आइसोलेशन के लिए ट्रेन की बोगियों को तैयार किया जा रहा
- फोटो : ANI
महामारी की शुरूआत में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा था कि एसी से कोरोना वायरस फैलने की संभावना बढ़ जाएगी, इसलिए ऐसे कोच का इस्तेमाल किया जाए जो अच्छे से वेंटिलेटेड हो। स्वास्थ्य जानकारों ने नॉन एसी कोच के इस्तेमाल की सलाह दी और कहा कि ये कोच तुलनात्मक तौर पर सुरक्षित रहेंगे।
16 जोनल रेलवे को जिम्मेदारी दी गई कि वे पांच हजार कोच की पहचान करें जिन्हें बदलना है और हर कोच में 16 कोविड-19 मरीजों को रखा जाएगा। ऐसे कुल 80,000 मरीजों को रखने की क्षमता रेलवे के पास हो गई। रेलवे ने कहा कि उसने 20,000 कोच अलग से तैयार कर दिए हैं जो जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किए जाएंगे।
ट्रेन कोच को कैसे बदला जा रहा है?
हर स्लीपर कोच को आठ केबिन में बांटा जा रहा है। हर कोच में से बीच वाली सीट हटा दी गई है, जिससे हर केबिन मे दो मरीज को ही रखा जा रहा है। चार शौचालयों में से दो को बाथरूम में बदल दिया गया है। खिड़कियों को मच्छरदानी में बदल दिया गया है। हर दिन मेडिकल इक्विपमेंट के लिए पावर प्लग सॉकेट लगाए गए हैं।
हर केबिन में प्लास्टिक के पर्दे लगा दिए गए हैं। हर केबिन में ऑक्सीजन सिलेंडर रख दिए गए हैं। हर कोच को लगाने में दो लाख रुपये तक की राशि लग गई है और अब तक 5,321 कोच लगा दिए गए हैं, जिसकी कुल लागत 100 करोड़ रुपये है।
आइसोलेशन के लिए ट्रेन की बोगियों को तैयार किया जा रहा
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आइसोलेशन कोच बनाने में सबसे बड़ी चुनौती गर्मी की तपन रही। इससे निपटने के लिए कई उपायों पर विचार-विमर्श किया गया। जिसमें कोच के ऊपर लगे शामियाने को हटाने का फैसला या फिर छतों को सोलर रिफलेक्टिंग पेंट से रंगने का विचार शामिल था।
अंत में आईआईटी बॉम्बे के डिजाइनकर्ताओं ने एक उपाय निकाला जिसकी मदद से कोच के तापमान को कई डिग्री नीचे लाया जा सकता था। डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ के लिए रेलवे ने एक एसी कोच भी अलग से लगा दिया है। इस बीच एक सवाल पैदा हुआ कि टॉयलेट वेस्ट को कैसे खत्म किया जाएगा। इस पर सहमति बनी कि बायोटॉयलेट के चेंबर में क्लोरीन टॉयलेट लगाए जाएं, इससे खतरा प्रभावहीन हो जाएगा।
कोचेस को लेकर एक और सवाल सामने आया कि कोच की बैटरी चार्ज की जाएंगी और पानी की टंकी को पूरा कैसे भरा जाएगा। देश में हर जगह ये सुविधाएं उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ बातचीत करने के बाद 215 स्टेशनों को चिन्हित किया गया।
इन 215 स्टेशनों में से 85 स्टेशनों पर रेलवे के अपने स्वास्थ्य कर्मी काम करने वाले हैं और अन्य 130 पर राज्य को डॉक्टर और नर्स की सुविधा उपलब्ध करानी पड़ेगी। ये सुविधा स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी प्रोटोकॉल के तहत मुहैया करानी होगी। हर आइसोलेशन ट्रेन नजदीकी अस्पताल से संपर्क में रहेगी। केंद्र सरकार अपनी इच्छा से इन्हें नहीं बनाएगी, राज्य सरकार को इसके लिए अपील करनी होगी।
आइसोलेशन के लिए ट्रेल की बोगियों को तैयार किया जा रहा
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नीति आयोग ने मई की शुरुआत में प्रस्ताव रखा था कि कुछ कोचेस को कोविड केयल लेवल-1 सेंटर की जगह अस्पताल में तब्दील कर दिया जाएगा। इसमें ऑक्सीजन, आईसीयू और वेंटिलेटर की सुविधाएं शामिल होंगी। इसके अलावा यह भी सुझाव दिया गया है कि रेलवे कोच को अपग्रेड करने में निजी अस्पताल की मदद ले सकता है।
रेलवे के साथ बैठक में नीति आयोग के सदस्य वीके पोल ने सुझाव दिया कि कोचेस को लेवल 2 और लेवल 3 कोविड केयर सेंटर में अपग्रेड किया जाएगा। रेलवे ने बताया कि कोच कोच को अस्पताल में अपग्रेड करने के लिए लगभग एक महीने का समय लगेगा।
यूरोप में सरकार ट्रेन के माध्यम से मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जा रही है। फ्रांस ने मार्च में टीजीवी हाई स्पी़ड ट्रेनों को इस्तेमाल मरीज को पेरिस से दूसरी जगह पर ले जाने के लिए किया। इसके अलावा स्पेन में भी मरीजों को मेडरीड से देश के दूसरे इलाकों में ले जाने के लिए हाई स्पीड ट्रेन का इस्तेमाल किया गया।