मां प्रेमा कुमारी और बेटी निमिषा प्रिया
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प्रताड़ित करता था, पासपोर्ट जब्त कर लिया था
माहदी निमिषा को प्रताड़ित करता था। निमिषा ने आरोप लगाया था कि माहदी उसे और उसके परिवार को परेशान करने लगा। उसने निमिषा का पासपोर्ट भी जब्त कर लिया था। वह चाहता था कि निमिषा यमन छोड़कर न जाए। उसने कई बार निमिषा को धमकाया भी था। माहदी ने उससे क्लीनिक सारे पैसे और गहने भी ले लिए। निमिषा की मां ने आरोप लगाया कि एक बार निमिषा ने सना पुलिस ने शिकायत की तो पुलिस ने माहदी के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय उल्टा निमिषा को ही गिरफ्तार कर लिया। उसे छह दिन के लिए जेल में डाल दिया।
पासपोर्ट पाने के लिए लगाया था बेहोशी का इंजेक्शन
निमिषा की मां प्रेमा कुमारी ने बताया कि जब निमिषा जेल से छूटी तो उसे एक जेल वार्डन ने बताया कि वह माहदी को बेहोशी का इंजेक्शन लगा दे और अपना पासपोर्ट लेकर चली जाए। निमिषा ने वैसा ही किया। मगर माहदी नशे का आदी था, इसलिए उस पर इंजेक्शन का असर नहीं हुआ। इसके बाद निमिषा ने उसको ज्यादा दवा दे दी। दवा के ओवरडोज से माहदी की मौत हो गई। इसके बाद यमन से भागने की कोशिश करते समय निमिषा को गिरफ्तार किया गया।
2018 में उसे हत्या का दोषी ठहराया गया। 2020 में सना की एक ट्रायल कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई। यमन की सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2023 में फैसले को बरकरार रखा, लेकिन ब्लड मनी का विकल्प खुला रखा। ब्लड मनी पीड़ित के परिवार द्वारा तय किया जाने वाला मुआवजा है। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ यमन के सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन 2023 में उनकी अपील खारिज कर दी गई। अब निमिषा की सजा को राष्ट्रपति ने मंजूरी दे दी है।
अप्रैल में मां ने की थी मुलाकात
अप्रैल में निमिषा की मां प्रेमा कुमारी ने उनसे यमन की जेल में मुलाकात की थी। जेल से लौटीं निमिषा प्रिया की मां प्रेमा कुमारी ने एक वीडियो के जरिये अपनी भावना बयां करते हुए भारत और यमन सरकार को शुक्रिया भी कहा था। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी सरकार की दयालुता के कारण ठीक है। जब वह जेल में गईं, तो उनकी बेटी उन्हें दूर से देखते ही दौड़ लगाकर आई, और गले लगा लिया।
वह रोते-रोते मुझे मम्मी कहकर पुकार रही थी। निमिषा की मां वे कई सालों अपनी बेटी से मिलने के लिए प्रयास कर रहीं थी। दिसंबर 2023 में उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर यमन जाने की अनुमति मांगी थी, ताकि वे अपनी बेटी की मौत की सजा माफ करवा सकें। अनुमति मिलने के बाद वह भारत से यमन गईं थीं। वह अभी भी यमन में ही हैं और ब्लड मनी के लिए बातचीत कर रही हैं।
रणधीर जायसवाल, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता
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विदेश मंत्रालय ने दिलाया मदद का भरोसा
भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की मदद का विदेश मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह नर्स प्रिया की पूरी मदद करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हमें निमिषा प्रिया के मामले की जानकारी है। प्रिया का परिवार कई विकल्पों के बारे में विचार कर रहा है। सरकार इस मामले में हर संभव मदद कर रही है। हम हर कानूनी मदद मुहैया कराएंगे।
खून के बदले रुपये देकर मिल सकती है माफी
प्रिया के लिए मौत की सजा से बचने का एकमात्र तरीका मृतक के परिवार से यमन कानून के अनुसार उन्हें खून की रकम देकर क्षमा प्राप्त करना है। इसके लिए प्रिया की मां यमन में ही हैं। प्रिया को बचाने के लिए सेव निमिषा प्रिया एक्शन काउंसिल बनाई गई है। काउंसिल के अनुसार निमिषा की रिहाई को लेकर बातचीत शुरू करने के लिए पहले 40 हजार डॉलर दिए जाने थे। यह रकम विदेश मंत्रालय के जरिये यमन में भारतीय दूतावास को दी जाएगी।
भारतीय दूतावास की ओर से नियुक्त वकील अब्दुल्ला अमीर को जुलाई में 20 हजार डॉलर दिए जा चुके थे। लेकिन इसके बाद अचानक बातचीत रुक गई। दूसरी किस्त के तौर पर शेष 20 हजार डॉलर देने की तैयारी की जा रही है। इसके बाद प्रिया को पूरी तरह से सजा से बचाने के लिए करीब 3 से 4 लाख डॉलर का भुगतान और करना होगा। यह रकम माहदी के परिवार को दी जाएगी।
ब्लड मनी यह होता है
अरब देशों में लागू इस्लामिक कानून के मुताबिक पीड़ित और उसका परिवार तय करते हैं कि अपराधी को क्या सजा दी जाए? मगर हत्या के मामले में पीड़ित परिवार को यह हक है कि वे हत्या अभियुक्त को पैसे लेकर माफ कर सकते हैं। इसे ब्लड मनी कहा जाता है। यह एक तरह का मुआवजा होता है। इसके लिए कोई रकम तय नहीं होती है। यह पीड़ित और अपराधी के परिजनों की सहमति से तय होता है।
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