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NEET: कैसे फूलप्रूफ हो सकती है NEET की परीक्षा, UPSC से क्या सीख सकती है सरकार?

अमित शर्मा
Updated Thu, 20 Jun 2024 04:33 PM IST

सार

नीट (NEET) परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी एनटीए (NTA) सहित विभिन्न स्तरों पर परीक्षा कराने वाली एजेंसियों को देश के ही संघ लोक सेवा आयोग से बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है, जो देश की सर्वोच्च परीक्षा आयोजित कराती है। परीक्षा में हर साल चार से पांच लाख परीक्षार्थी शामिल होते हैं, लेकिन इसके बाद भी आज तक इसमें किसी लीक की बात सामने नहीं आई।
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नीट पेपर। - फोटो : अमर उजाला


नीट (NEET) परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी एनटीए (NTA) सहित विभिन्न स्तरों पर परीक्षा कराने वाली एजेंसियों को देश के ही संघ लोक सेवा आयोग से बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है, जो देश की सर्वोच्च परीक्षा आयोजित कराती है। परीक्षा में हर साल चार से पांच लाख परीक्षार्थी शामिल होते हैं, लेकिन इसके बाद भी आज तक इसमें किसी लीक की बात सामने नहीं आई। इसी प्रकार सबसे बड़ी इंजीनियरिंग परीक्षा जेईई में भी किसी बड़ी धांधली की बात अब तक सामने नहीं आई है। एजेंसियों से इसमें बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है। 


कहां होती है गड़बड़ी 

छात्रों को नीट और जेईई जैसी परीक्षाओं के लिए कोचिंग कराने वाले मोहम्मद आजम ने अमर उजाला से कहा कि इन परीक्षाओं में कई स्तरों पर लीक होने की संभावना रहती है। पेपर सेट का एक स्थान पर बनना, उसकी हार्ड कॉपी देश के किसी दूसरे कोने तक किसी वाहन के द्वारा पहुंचाना, वहां किसी बैंक में इसे सुरक्षित रखना और परीक्षा होने के पहले इसे परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने में अनेक स्तरों पर मानवीय हस्तक्षेप होता है। 




चूंकि इसमें ज्यादातर मामलों में निजी क्षेत्र के बेहद कम वेतन पर काम करने वाले लोग शामिल होते हैं, ऐसे में उन्हें पैसों का लालच देकर बड़ा भ्रष्टाचार करने की संभावना बनी रहती है। यदि परीक्षाओं में धांधली को कम करना है, तो मानवीय हस्तक्षेप को कम से कम करने पर विचार किया जाना चाहिए।    


जिन परीक्षा केंद्रों पर परीक्षाएं आयोजित कराई जाती हैं, वहां भी परीक्षा केंद्रों के संचालकों-प्रबंधन और अध्यापकों के जरिए बड़े पैमाने पर धांधली करने की संभावना बनी रहती है। इससे बचने के लिए केवल सरकारी परीक्षा केंद्रों को सेंटर बनाने पर विचार किया जाना चाहिए।


जेईई की परीक्षा का मॉडल श्रेष्ठ 

नीट की परीक्षा में बच्चे एक उत्तर पुस्तिका में सही उत्तर के गोलों पर निशान लगाते हैं। इनको चेक करके ही बच्चों को अंक दिए जाते हैं। लेकिन जेईई की परीक्षा में बच्चों की परीक्षा कंप्यूटर पर होती है। पहले से आवंटित कंप्यूटर पर परीक्षा की शुरुआत होने के बाद मुख्य परीक्षा केंद्र से प्रश्न पत्र आता है। परीक्षा का समय समाप्त होने के तुरंत बाद कंप्यूटर अपने आप लॉक हो जाता है। इसके तुरंत बाद छात्रों का डिजिटल उत्तर एजेंसी के मुख्यालय पर सुरक्षित हो जाता है। इसके बाद इसमें कोई बदलाव करना संभव नहीं रहता है।    


नीट के छात्रों की परीक्षा भी इसी तरह ली जा सकती है। ज्यादा अभ्यर्थी होने पर परीक्षा को साल में दो या तीन बार आयोजित कराई जा सकती है। इससे बच्चों पर भी साल में एक ही बार अवसर मिल पाने के दबाव से बचा जा सकेगा। छात्र अपनी तैयारी के बाद अपने मनपसंद सत्र में परीक्षा दे सकते हैं। चयनित छात्रों को नए वर्ष में संबंधित कॉलेज में दाखिला दिया जा सकता है। इन उपायों को अपनाकर प्रश्न पत्रों की लीक से बहुत हद तक बचा जा सकता है।
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ऊपर बैठे लोगों को मिले दंड   

मो. आजम ने कहा कि किसी भी पेपर लीक के मामले में खुलासा होने पर केवल निचले स्तर के लोगों को सजा मिल पाती है, जबकि इसके असली अपराधी उच्च स्तर पर बैठे लोग होते हैं। वर्तमान नीट मामले में भी कुछ बहुत बड़े रसूखदार लोगों के नाम सामने आ रहे हैं। यदि किसी जांच में दोषी पाए जाने के बाद उच्च स्तर पर बैठे लोगों को कड़ी सजा मिले तो इस तरह के भ्रष्टाचार के छात्रों को बचाया जा सकता है।
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