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राजनीतिः कांग्रेस की उम्मीदों का पहाड़ कैसे उठाएंगे कन्हैया, राहुल गांधी के मिशन को कितनी मिलेगी मजबूती

Tue, 28 Sep 2021 10:03 PM IST
सुरेंद्र जोशी अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कई दिग्गज युवा नेता कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं, ऐसे में क्या कन्हैया कुमार का प्रवेश पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश फूंकने में कामयाब होगा? सभी के जेहन में यह सवाल उठ रहा है।
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कन्हैया कुमार के स्वागत में कांग्रेस मुख्यालय में जश्न का माहौल - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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जिस दौर में ज्योतिरादित्य सिंधिया, जितिन प्रसाद, प्रियंका चतुर्वेदी और सुष्मिता देव जैसे राहुल गांधी के युवा सिपाहसालारों ने उनका साथ छोड़कर दूसरे दलों का दामन थाम लिया है, उस दौर में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति से निकले कन्हैया कुमार ने कांग्रेस का दामन थामा है। ऐसे में स्वाभाविक सवाल उभरता है कि कन्हैया कुमार ने क्या सोचकर कांग्रेस का दामन थामा? वे कम्युनिस्ट पार्टी में रहकर उसके लिए कोई करिश्मा नहीं कर सके, ऐसे में बड़ा सवाल है कि वे कांग्रेस के लिए क्या कर पाएंगे?

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इन सवालों का जवाब मंगलवार को कांग्रेस का दिल्ली मुख्यालय 24, अकबर रोड स्वयं दे रहा था। यूपीए सरकार के जाने के बाद बहुत कम अवसर ऐसे आए हैं जब कांग्रेस मुख्यालय पर इस तरह की भीड़ देखी गई हो। पार्टी के बड़े नेताओं की प्रेस ब्रीफिंग में भी गिने-चुने पत्रकार ही आते हैं, लेकिन कन्हैया कुमार के कांग्रेस ज्वाइन करने के दिन पार्टी के प्रेस कांफ्रेंस हाल में तिल भर जगह रिक्त नहीं थी। दर्जनों पत्रकारों को खड़े रहकर यह कार्यक्रम कवर करना पड़ा।

स्वागत है, स्वागत है, कन्हैया कुमार तु्म्हारा स्वागत है
पार्टी मुख्यालय के बाहर गाड़ियों को खड़ी करने की जगह नहीं रह गई थी तो पार्टी के अंदर के बड़े मैदान में कार्यकर्ताओं की विशाल संख्या मौजूद थी। 'स्वागत है, स्वागत है, कन्हैया कुमार तुम्हारा स्वागत है’ के नारे लगाते हुए युवा कार्यकर्ताओं की फौज इस बात की तरफ इशारा कर रही थी कि कांग्रेस ने कन्हैया कुमार के रूप में एक आवाज पा लिया है। एक युवा नेता कन्हैया कुमार के पार्टी में शामिल कराने के अवसर पर पार्टी मुख्यालय में स्वयं राहुल गांधी का उपस्थित होना और प्रेस कांफ्रेंस के दौरान भी केसी वेणुगोपाल जैसे दिग्गजों का उपस्थित रहना बता रहा था कि पार्टी को कन्हैया कुमार के रूप में एक उम्मीद मिली है।
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पीएम व भाजपा पर साधा निशाना

कन्हैया कुमार ने इस सवाल का जवाब स्वयं ही दे दिया कि उन्होंने कांग्रेस का दामन क्यों थामा। इस सवाल के जवाब में उन्होंने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया और कहा कि इस समय देश संकट में है। देश के सांस्कृतिक मूल्यों, संवैधानिक संस्थाओं की साख और देश की चिंतन परंपरा खतरे में है। इतिहास बदलने की जबरिया कोशिश की जा रही है और ऐसे समय में वे चुप नहीं रह सकते थे। उन्हें लगता है कि कांग्रेस देश की महान परंपराओं की वाहक है और यदि देश को और इसके लोकतंत्र को बचाना है तो कांग्रेस को बचाना होगा।

बिहार में कांग्रेस के पास प्रभावी नेता नहीं
कन्हैया कुमार के साथ आए एक कार्यकर्ता अनिल कुमार के अनुसार, बिहार में कांग्रेस के पास कोई प्रभावी नेता नहीं है। राज्य के छोटे-छोटे दलों से पार्टी को उनकी मनचाही कीमतों पर समझौता करना पड़ता है। ऐसे में यदि कन्हैया कुमार पार्टी के साथ जुड़ते हैं तो वे कांग्रेस के लिए एक नई उम्मीद पैदा करेंगे। यदि बिहार की राजनीति मेें कन्हैया कुमार, तेजस्वी यादव और चिराग पासवान को लेकर एक गठबंधन बनाना संभव हुआ तो यह बिहार की राजनीति को पलटकर रख देगा।

बिहार की राजनीति में इस समय भुमिहार जाति के पास कोई अपना नेता नहीं है। वह बिहार में भाजपा को मजबूरी में समर्थन कर रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी यह वर्ग अपनी परंपरागत राजनीति के उलट जाकर आरजेडी का समर्थन करने के असमंजस से गुजर रहा था। यहां तक कि कन्हैया कु्मार और गिरिराज सिंह की बेगूसराय की चुनावी लड़ाई को भी भुमिहारों के बीच की लड़ाई के रूप में ही देखा गया था। यदि इस बीच कन्हैया कुमार भुमिहारों को कांग्रेस के साथ जोड़ पाते हैं तो इससे बिहार में कांग्रेस पार्टी का पुनर्जन्म हो जाएगा।

भाजपा के पास बिहार में युवा चेहरे का संकट
बिहार भाजपा में भी युवा नेतृत्व का संकट है। पार्टी अभी भी सुशील मोदी, गिरिराज सिंह, रविशंकर प्रसाद, भूपेंद्र यादव जैसे कुछ गिने-चुने नेताओं के आसपास ही भटक रही है और पार्टी ने किसी युवा चेहरे को नेतृत्व के रूप में उभारने का काम नहीं किया है। ऐसे में यदि कन्हैया कुमार कांग्रेस का चेहरा बनते हैं तो तेजस्वी यादव और चिराग पासवान की यह तिकड़ी जनता को ज्यादा बेहतर ढंग से आकर्षित कर सकती है और बिहार में एक नए दौर की राजनीति की शुरूआत हो सकती है।

कांग्रेस के लिए भीड़ जुटाने वाले नेता बनेंगे दोनों

गुजरात से आने वाले कांग्रेस पार्टी के एक नेता ने अमर उजाला से कहा कि पार्टी के कुछ नेता कन्हैया कुमार के नाम को लेकर असहज अवश्य हैं, लेकिन कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी को पार्टी में आने का फैसला लंबे समय में पार्टी के हित में होगा। पार्टी के पास ऐसे वक्ताओं की कमी है जिनके भाषणों में जनता को अपील करने की ताकत हो। कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी दोनों ही कांग्रेस के लिए अच्छे स्तर के वक्ता और भीड़ जुटाने वाले नेता बन सकते हैं।

गुजरात में कांग्रेस के पास कामचलाऊ नेता भी नहीं
नेता के मुताबिक, गुजरात में पार्टी के पास जिताऊ नेता तो छोड़िए कामचलाऊ नेता भी नहीं बचे हैं। जो नेता वर्तमान में मौजूद हैं उनकी जमीनी पकड़ और जनता के बीच अपील नहीं है। पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को इस कमी का सामना करना पड़ा था। पूरा दारोमदार केवल राहुल गांधी तक सीमित था। पार्टी नेताओं के मुताबिक अगर पार्टी की नीतियों को मतदाताओं तक पहुुंचाने वाले नेता होते तो पार्टी पिछले विधानसभा चुनाव में ही जीत हासिल कर चुकी होती।

हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवाणी जैसे युवाओं के रूप में कांग्रेस के पास केवल बोलने वाले नेता ही नहीं होंगे, बल्कि उनका अपना एक प्रशंसक वर्ग है। ये नेता अपने युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं और उनके साथ हमेशा डटकर खड़े रहने के लिए भी तैयार हैं। ऐसे में इन नेताओं को पार्टी में लाने से बड़ा लाभ होगा।
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कोई करिश्मा नहीं कर पाएंगे : भाजपा

कन्हैया कुमार के कांग्रेस के आने की खबर आते ही भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने उन्हें टुकड़े-टुकड़े गैंग का सदस्य बताकर हमला किया। उन्होंने कहा कि जो अपना लोकसभा सीट तक नहीं बचा सका और एक दल में रहते हुए उसके लिए कोई काम नहीं कर सका, वह दूसरे दल कांग्रेस में जाकर कोई करिश्मा नहीं कर पाएगा।
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