कन्हैया कुमार ने इस सवाल का जवाब स्वयं ही दे दिया कि उन्होंने कांग्रेस का दामन क्यों थामा। इस सवाल के जवाब में उन्होंने भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया और कहा कि इस समय देश संकट में है। देश के सांस्कृतिक मूल्यों, संवैधानिक संस्थाओं की साख और देश की चिंतन परंपरा खतरे में है। इतिहास बदलने की जबरिया कोशिश की जा रही है और ऐसे समय में वे चुप नहीं रह सकते थे। उन्हें लगता है कि कांग्रेस देश की महान परंपराओं की वाहक है और यदि देश को और इसके लोकतंत्र को बचाना है तो कांग्रेस को बचाना होगा।
बिहार में कांग्रेस के पास प्रभावी नेता नहीं
कन्हैया कुमार के साथ आए एक कार्यकर्ता अनिल कुमार के अनुसार, बिहार में कांग्रेस के पास कोई प्रभावी नेता नहीं है। राज्य के छोटे-छोटे दलों से पार्टी को उनकी मनचाही कीमतों पर समझौता करना पड़ता है। ऐसे में यदि कन्हैया कुमार पार्टी के साथ जुड़ते हैं तो वे कांग्रेस के लिए एक नई उम्मीद पैदा करेंगे। यदि बिहार की राजनीति मेें कन्हैया कुमार, तेजस्वी यादव और चिराग पासवान को लेकर एक गठबंधन बनाना संभव हुआ तो यह बिहार की राजनीति को पलटकर रख देगा।
बिहार की राजनीति में इस समय भुमिहार जाति के पास कोई अपना नेता नहीं है। वह बिहार में भाजपा को मजबूरी में समर्थन कर रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी यह वर्ग अपनी परंपरागत राजनीति के उलट जाकर आरजेडी का समर्थन करने के असमंजस से गुजर रहा था। यहां तक कि कन्हैया कु्मार और गिरिराज सिंह की बेगूसराय की चुनावी लड़ाई को भी भुमिहारों के बीच की लड़ाई के रूप में ही देखा गया था। यदि इस बीच कन्हैया कुमार भुमिहारों को कांग्रेस के साथ जोड़ पाते हैं तो इससे बिहार में कांग्रेस पार्टी का पुनर्जन्म हो जाएगा।
भाजपा के पास बिहार में युवा चेहरे का संकट
बिहार भाजपा में भी युवा नेतृत्व का संकट है। पार्टी अभी भी सुशील मोदी, गिरिराज सिंह, रविशंकर प्रसाद, भूपेंद्र यादव जैसे कुछ गिने-चुने नेताओं के आसपास ही भटक रही है और पार्टी ने किसी युवा चेहरे को नेतृत्व के रूप में उभारने का काम नहीं किया है। ऐसे में यदि कन्हैया कुमार कांग्रेस का चेहरा बनते हैं तो तेजस्वी यादव और चिराग पासवान की यह तिकड़ी जनता को ज्यादा बेहतर ढंग से आकर्षित कर सकती है और बिहार में एक नए दौर की राजनीति की शुरूआत हो सकती है।
गुजरात से आने वाले कांग्रेस पार्टी के एक नेता ने अमर उजाला से कहा कि पार्टी के कुछ नेता कन्हैया कुमार के नाम को लेकर असहज अवश्य हैं, लेकिन कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी को पार्टी में आने का फैसला लंबे समय में पार्टी के हित में होगा। पार्टी के पास ऐसे वक्ताओं की कमी है जिनके भाषणों में जनता को अपील करने की ताकत हो। कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी दोनों ही कांग्रेस के लिए अच्छे स्तर के वक्ता और भीड़ जुटाने वाले नेता बन सकते हैं।
गुजरात में कांग्रेस के पास कामचलाऊ नेता भी नहीं
नेता के मुताबिक, गुजरात में पार्टी के पास जिताऊ नेता तो छोड़िए कामचलाऊ नेता भी नहीं बचे हैं। जो नेता वर्तमान में मौजूद हैं उनकी जमीनी पकड़ और जनता के बीच अपील नहीं है। पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को इस कमी का सामना करना पड़ा था। पूरा दारोमदार केवल राहुल गांधी तक सीमित था। पार्टी नेताओं के मुताबिक अगर पार्टी की नीतियों को मतदाताओं तक पहुुंचाने वाले नेता होते तो पार्टी पिछले विधानसभा चुनाव में ही जीत हासिल कर चुकी होती।
हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवाणी जैसे युवाओं के रूप में कांग्रेस के पास केवल बोलने वाले नेता ही नहीं होंगे, बल्कि उनका अपना एक प्रशंसक वर्ग है। ये नेता अपने युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं और उनके साथ हमेशा डटकर खड़े रहने के लिए भी तैयार हैं। ऐसे में इन नेताओं को पार्टी में लाने से बड़ा लाभ होगा।
कन्हैया कुमार के कांग्रेस के आने की खबर आते ही भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने उन्हें टुकड़े-टुकड़े गैंग का सदस्य बताकर हमला किया। उन्होंने कहा कि जो अपना लोकसभा सीट तक नहीं बचा सका और एक दल में रहते हुए उसके लिए कोई काम नहीं कर सका, वह दूसरे दल कांग्रेस में जाकर कोई करिश्मा नहीं कर पाएगा।