पाक उच्चायोग में तैनात महमूद अख्तर उर्फ मेहबूब राजपूत के पास दिल्ली के पते पर बना आधार कार्ड कहां से आया। क्या दिल्ली में भी एजेंट ने अपना नेटवर्क तैयार किया हुआ है। दिल्ली में कौन-कौन लोग इससे मिले हुए हैं, पुलिस इसका पता लगाने का प्रयास कर रही है।
जांच के बाद पता चला है कि आरोपी ने पुरानी दिल्ली का अपना पता (2350, गली नजदीक मदारी, रोदग्रान मोहल्ला, चांदनी चौक) दिया है, वह फर्जी है। वह वहां पर कभी रहा ही नहीं। पुलिस आशंका जता रही है कि अपने लोकल नेटवर्क के जरिये महमूद ने फर्जी कागजातों के आधार पर आधार कार्ड प्राप्त किया।
पुलिस मौलाना व सुभाष से पूछताछ कर दिल्ली के लोकल नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास कर रही है। बता दें कि जासूसी के मामले में अपराध शाखा ने पिछले कुछ माह के दौरान तीसरे मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। दिसंबर 2015 में अपराध शाखा ने बीएसएफ के जवान सहित कुछ लोगों को गिरफ्तार कर जासूसी के एक मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था।
वहीं जनवरी 2016 में पठानकोट से एयरफोर्स के जवान रंजीत को गिरफ्तार कर एक अन्य मॉड्यूल का पर्दाफाश किया था। बताया जा रहा है कि दोनों माड्यूल का पर्दाफाश करने के बाद से पुलिस की जासूसों पर नजर थी। पुलिस अध्किारियों को मौलाना व सुभाष से पूछताछ के बाद दिल्ली के नेटवर्क का भी पता चलने की उम्मीद है।