आरएसएस महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने आपातकाल के काले दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि हमारे अपने लोगों ने ही संविधान का दुरुपयोग किया। उन्होंने आम लोगों और जयप्रकाश नारायण जैसे व्यक्तियों की आवाज को दबा दिया।
देश में आवाज दबाना कभी सफल नहीं हो सका
होसबोले ने कहा कि इतिहास के उन काले दौर को याद करना काफी मुश्किल होता है। आपातकाल और उसके खिलाफ हुए संघर्ष को याद रखना महत्वपूर्ण है। कई बार हमें ऐसा लगता है कि आखिर क्यों हम क्रूरता को याद करें। संघ के तीसरे सरसंघचालक बाला साहब देवरस ने आपातकाल के बाद कहा था कि माफ करो और भूल जाओ। लेकिन इतिहास काले दौर में हुए अत्याचार को याद रखेगा। उस दौरान व्यापक बर्बरता थी। पुलिस और प्रशासन ऐसा भी कर सकते हैं, यह आपातकाल के दौरान ही अनुभव हुआ।
जून 1975 में देश में तीन बड़ी घटनाएं हुईं
संघ पदाधिकारी ने कहा कि जून 1975 में देश में तीन बड़ी घटनाएं हुई थी, जिस वजह से इंदिरा सरकार को आपातकाल लगाना पड़ गया था। पहला- जेपी आंदोलन एक जून तक राष्ट्रव्यापी बन चुका था। दूसरा- गुजरात विधानसभा चुनाव में इंदिरा की कांग्रेस सरकार को करारी हार मिली। तीसरा- इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस सिन्हा ने रायबरेली से जीती इंदिरा गांधी को अयोग्य घोषित कर दिया था। इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए काला धब्बा लग गया। संघ आपातकाल के खिलाफ संघर्ष कर रही थी, इसलिए इसे दबाया जा रहा था। संघ के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया गया। उन्हें जेल में डाला गया था। सरकारी सेवाओं से निलंबित कर दिया गया। लोकतांत्रिक देश में लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश लंबे समय तक सफल नहीं हो पाती। लोकतंत्र में जनता की आवाज ही मजबूत रहती है।