नॉर्थ ब्लॉक स्थित केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक मजबूत जाल बिछाया है। पिछले कई सप्ताह से गृह मंत्रालय में एक अजीब सी परेशानी महसूस हो रही थी। मंत्रालय के बीच में जो खाली जगह है, वहां पर अवांछित तत्व आकर कर्मियों को परेशान करते हैं। जब उनका मन करता है, तो वे छत के रास्ते नीचे आ जाते हैं। किसी व्यक्ति के कपड़े खराब कर देते हैं, तो किसी का सामान बिखेर जाते हैं। कोई कर्मचारी ज्यादा विरोध करता है, तो वे उसे थप्पड़ जड़ने से भी पीछे नहीं हटते। हम यहां बात कर रहे हैं कि बंदरों और कबूतरों की।
गृह मंत्रालय में इन दोनों की अच्छी खासी संख्या है। ये दोनों सुबह आ जाते हैं और देर शाम तक वहां मंडराते रहते हैं। कबूतरों का हाल तो ऐसा है कि वे कर्मियों के बालों को टच करते हुए उड़ते रहते हैं। अगर दोपहर को लॉन में बैठकर कोई कर्मचारी खाना खाता है, तो उसमें बीट या पंख गिरना आम बात है। चूंकि अब सर्दियां आ रही हैं, तो हल्की धूप का आनंद लेने के लिए कर्मचारी कभी-कभार अपने दफ्तर से बाहर निकल आते हैं।
वे दो तीन मिनट ही खड़े होते हैं कि कोई न कोई कबूतर उनकी परेशानी बढ़ाने के लिए वहां आ जाता है। यदि कबूतर न आए, तो बंदर उत्पात मचा देता है। गृह मंत्रालय के गलियारों में भी कबूतरों ने अपना ठिकाना बना रखा है।
वहीं बंदरों के हाथ जब कुछ खाने का सामान नहीं लगता, तो वे कर्मियों पर अपना गुस्सा निकालते हैं। इन दोनों से निजात पाने के लिए गृह मंत्रालय के लॉन के ऊपर एक जाल बिछाया गया है। यानी अब बंदर या कबूतर छत के रास्ते नीचे नहीं आ सकेंगे। चूंकि कबूतर हल्का होता है, इसलिए वह इस जाल के उपर बैठ सकता है, मगर बंदर का वजन अधिक होने के कारण वह जाल पर नहीं आता। अभी दो तीन दिन से गृह मंत्रालय में कुछ राहत है।