भारत में एचआईवी के मामलों में 26.6 फीसदी कमी के साथ एड्स के मामलों में भी कमी देखी गई है। साल 2010-2017 के बीच एड्स से संबंधित मौतों में 56.8 फीसदी की कमी आई है। यह बात संयुक्त राष्ट्र की नई रिपोर्ट में सामने आई है। वहीं ऐसे मामलों की संख्या बढ़ने के कारण रिपोर्ट में पाकिस्तान और फिलीपींस को चेतावनी दी गई है।
भारत में नए एचआईवी संक्रमण में भी कमी आई है। यह साल 2010 में यह आंकड़ा 1.2 लाख था जो कि साल 2017 में 88,000 पर आ गया। वहीं एड्स से होने वाली मौतों भी कमी आई है। यह आंकड़े 2010 में 1.6 लाख थे जो कि 2017 में 69,000 पर आ गए। वहीं एक ही समय अवधि में जो लोग एचआईवी से पीड़ित हैं उनकी संख्या भी 23 लाख से कम होकर 21 लाख हो गई।
रिपोर्ट में कहा गया है भारत ने वैश्विक स्तर पर काफी अच्छा प्रदर्शन किया है। वैश्विक स्तर पर नए संक्रमण में 2010 से लेकर 2017 तक 18 फीसदी की कमी आई है। इसके लिए 2020 तक 70 फीसदी कम करने का उद्देश्य रखा गया है। वहीं संक्रमण से होने वाली मौतों में साल 2010-2017 के बीच वैश्विक स्तर पर 34 फीसदी की कमी देखी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी के विस्तार और अन्य उपचार विकल्पों तक पहुंच बढ़ रही है जिस कारण यह अच्छे परिणाम देखने को मिले।
रिपोर्ट के मुताबिक सतत और केंद्रित प्रयासों द्वारा मुख्य आबादी तक पहुंचने से कंबोडिया, भारत, मयांमार, थाईलैंड और वियतनाम में साल 2010 से 2017 के बीच एचआईवी संक्रमण में कमी आई है। लेकिन यह मामले पाकिस्तान और फिलीपींस में कम होने की बजाय बढ़े हैं। इस रिपोर्ट का नाम है 'माइल्स टू गो-क्लोजिंग गैप्स, ब्रेकिंग बैरियर्स, राइटिंग इन्जस्टिसेज'।