5. दागी नेता: आपराधिक छवि के नेताओं को चुनाव लड़ने से रोकने के लिए दायर याचिका पर उच्चतम न्यायालय में पूर्व सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाया था। अदालत ने पांच साल या उससे ज्यादा सजा के मामले में आरोप तय होने के बाद उम्मीदवार के चुनाव लड़ने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और कानून बनाने का काम संसद के ऊपर छोड़ दिया था।
6. जनप्रतिनिधि वकील कर सकते हैं प्रैक्टिस: पूर्व न्यायधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें पेशे से वकील जनप्रतिनिधियों के देशभर की अदालतों में प्रैक्टिस करने पर रोक लगाने की मांग की गई थी। उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि कानून अदालतों में उनके प्रैक्टिस करने पर कोई पाबंदी नहीं लगा सकता है।
7. अदालती कार्यवाही का सीधा प्रसारण: संसद की तरह अब जल्द ही उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय सहित सभी अदालतों की सुनवाई का सीधा प्रसारण किया जाएगा। पूर्व मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अदालत की कार्यवाही के सीधे प्रसारण को हरी झंडी दे दी है। अदालत ने कहा कि अब लोगों को अदालत आने की जरूरत नहीं पड़ेगी। भारत में अदालत सबके लिए खुली हैं।
8. राम जन्मभूमि: बाबरी मस्जिद- पूर्व सीजेआई की अध्यक्षता वाली विशेष खंडपीठ ने अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सिर्फ मालिकाना हक के वाद के रूप में ही विचार करने और तमाम हस्तक्षेपकर्ताओं को दरकिनार करने का निश्चय करके यह सुनिश्चित किया कि इस संवेदनशील मामले में जल्द से जल्द सुनवाई शुरू हो सके।
9. व्यभिचार: ऐतिहासिक फैसला देते हुए उच्चतम न्यायालय ने व्यभिचार को भारत में आपराधिक श्रेणी से बाहर कर दिया था। अपने फैसले में अदालत ने परस्त्रीगमन को अपराध की श्रेणी में रखने वाली भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को असंवैधानिक घोषित करते हुये उसे निरस्त कर दिया था। अदालत ने धारा 497 की व्याख्या करते हुए कहा था कि इस धारा के अनुसार पत्नी पति की संपत्ति मानी जाती है जोकि भेदभावपूर्ण है।
10. राफेल: राफेल देशभर में एक ऐसा मुद्दा बना हुआ है जिसकी वजह से कांग्रेस ने तीन राज्यों में भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया। इस मामले को लेकर अदालत में कई याचिकाएं दायर की गई थीं। जिसपर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार को क्लीनचिट दे दी थी। फैसले में अदालत ने कहा था, 'राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई अवसर नहीं है। हमें लड़ाकू विमानों की जरूरत है और देश लड़ाकू विमानों के बगैर नहीं रह सकता है। राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत पर निर्णय लेना अदालत का काम नहीं है।'
11. इच्छामृत्यु: उच्चतम न्यायालय के पांच जजों की संविधान पीठ ने लिविंग विल यानी इच्छा मृत्यु को मंजूरी दे दी थी। अदालत ने लिविंग विल में पैसिव यूथेनेशिया को इजाजत देते हुए सुरक्षा उपायों के लिए गाइडलाइन भी जारी की थी। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा था कि जीने के अधिकार में गरिमापूर्ण मृत्यु का अधिकार भी शामिल है ये हम ये नहीं कहेंगे। हम ये कहेंगे कि गरिमापूर्ण मृत्यु पीड़ारहित होनी चाहिए। कुछ ऐसी प्रक्रिया होनी चाहिए जिसमें गरिमपूर्ण तरीके से मृत्यू हो सके।