इस साल 18 युद्धपोत नौसेना में होंगे शामिल, भारत से निर्यात भी किया जाएगा। नौसेना कमांडर सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा-संकट दहलीज तक पहुंचे, उससे पहले पूरी तैयारी होनी चाहिए।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नौसेना के शीर्ष कमांडरों से अपनी रणनीतिक तैयारी को नए स्तर पर ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक, अनिश्चितता और पड़ोस की चुनौतियों को देखते हुए अब पुराने ढर्रे पर काम नहीं चल सकता। हमारी तैयारी ऐसी होनी चाहिए कि कोई भी संकट हमारे दरवाजे तक पहुंचे, उससे पहले ही हम उससे निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हों।
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एक वर्ष में शामिल युद्धपोतों का सबसे बड़ा आंकड़ा होगा
रक्षा मंत्री ने कहा कि मौजूदा वर्ष में नौसेना में 18 युद्धपोतों को कमीशन किए जाने की योजना है, जो नौसेना के इतिहास में एक वर्ष में शामिल युद्धपोतों का सबसे बड़ा आंकड़ा होगा। उन्होंने कहा कि हाल में कमीशन किए गए युद्धपोतों में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री है। भारत को अपनी जरूरतें पूरी करने के साथ-साथ मित्र देशों को युद्धपोतों का निर्यात करने की दिशा में भी आगे बढ़ना चाहिए। ब्यूरो
निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता बेहतर करनी होगी
नौसेना ने तीन दिवसीय कमांडर सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजनाथ ने कहा कि हमें अपनी सैन्य तैयारियों में भू-रणनीतिक सोच व आकस्मिक परिस्थितियों के लिए योजनाएं शामिल करनी ही होंगी। रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्री क्षेत्र में भीड़भाड़, छल और ग्रे-जोन गतिविधियों ने समुद्री सुरक्षा को पहले की तुलना में कहीं अधिक जटिल बना दिया है।
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नौसेना सिर्फ समुद्री सीमाओं की रक्षा नहीं करती
ऐसे में निगरानी और प्रतिक्रिया क्षमता बेहतर बनाने की जरूरत है। सिंह ने कहा कि नौसेना सिर्फ समुद्री सीमाओं की रक्षा नहीं करती बल्कि वह विकसित भारत की परिकल्पना का आधार है। नौसेना आर्थिक सुरक्षा, समुद्री शक्ति-प्रक्षेपण में भी भूमिका निभा रही है।