वेतन देने के लिए तो पैसे हैं नहीं, प्रदेश कर्जे में डूबा है...
सोलन के माल रोड पर शाम को नो एंट्री लागू होने के बाद दर्जनों लोगों से बातचीत करने का प्रयास किया गया, लेकिन अधिकांश मतदाताओं ने चुप्पी साध ली। वे बहुत कुछ बताना चाह रहे थे, लेकिन कैमरे के सामने नहीं। मुश्किल से व्यापारी यशपाल बिट्टू अपनी बात कहने को तैयार हुए। जब उनसे पूछा गया कि एक पार्टी सत्ता में आने के बाद 'ओपीएस' लागू करेगी। बिट्टू ने कहा, ये कैसे लागू करेंगे? पेंशन कहां से देंगे? वेतन देने के लिए तो पैसे हैं नहीं। हिमाचल प्रदेश तो पहले ही कर्जे में डूबा पड़ा है। राजनीतिक दल सिर्फ 'मीठी' गोली दे रहे हैं। यह एक ऐसा राज्य है, जहां केंद्र के बिना कुछ नहीं मिलेगा। स्टेट तो खाली पड़ा है। कभी 1500 रुपये देने की बात कहते हैं तो कभी पुरानी पेंशन बहाली का वादा कर रहे हैं। यह केवल वोट की राजनीति हो रही है। कर्मचारियों को गुमराह किया जा रहा है। वे भी जानते हैं कि पुरानी पेंशन नहीं मिलने वाली। पीएम मोदी ने कहा है कि पहले अपने पैरों पर खड़े हो जाओ। उसके बाद कुछ मिलेगा। इस चुनाव में पांच साल वाला रिवाज तो पक्का टूटेगा। डबल इंजन की सरकार है तो उसका फायदा मिलना भी तय है।
लोगों ने दोनों नेताओं के भाषण का पूरा मजा लिया
सोलन में बन रहे फ्लाईओवर के पास मिले मोहन लाल ने कहा, राजनेता जैसा बोलते हैं, वैसा कुछ करते नहीं। यही वजह है कि इस बार मतदाता चुनाव में दिलचस्पी नहीं ले रहे। पीएम मोदी और प्रियंका गांधी सोलन आ चुके हैं। यहां के लोगों ने दोनों नेताओं के भाषण का पूरा मजा लिया। किसी को निराश नहीं किया। पुरानी पेंशन लागू कराने के लिए कर्मचारी संघर्ष कर रहे हैं, ये ठीक बात है। यहां अहम तथ्य यह है कि इसके लिए बजट कहां से आएगा? ओपीएस केवल एक शिगूफा है। हां, यह बात सही है कि कर्मचारी वर्ग, इस मुद्दे पर कांग्रेस का साथ दे रहा है। छह नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां रैली की थी। उन्होंने सोलन के मनोहर लाल चने वाले, पीडब्ल्यूडी के चौकीदार खड़क बहादुर व सुंदर लाल का जिक्र किया। ऐसा करके पीएम ने खुद को सरकारी कर्मचारियों से जोड़ने का प्रयास किया। मोदी बोले, मैंने सोलन में बहुत समय बिताया है। जब मैं हिमाचल प्रदेश का प्रभारी था तो सोलन ने मुझे खूब इज्जत दी और खूब खिलाया भी।