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Himachal Pradesh: सोलन में किसने दी 'मीठी' गोली, मोदी-प्रियंका की रैली के बाद मौन क्यों हैं मतदाता?

Thu, 10 Nov 2022 08:35 AM IST
कुमार सम्भव जैन जितेंद्र भारद्वाज, सोलन से

सार

सोलन में पीएम मोदी और प्रियंका गांधी वाड्रा की चुनावी रैली हो चुकी है। इसके बावजूद यहां के मतदाताओं ने खामोशी की चादर ओढ़ रखी है। ऊंट किस करवट बैठेगा, इसका अंदाजा लगाना भी बेहद मुश्किल हो रहा है। 
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सोलन में क्या बन रहे हैं समीकरण? - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में हॉट सीट बना 'सोलन' विधानसभा क्षेत्र राजनीतिक दलों के लिए पहेली की तरह बना हुआ है। यहां के मतदाता किसी भी दल को अपने 'मन की बात' नहीं बता रहे हैं। जो भी नेता वोट मांगने आता है, उसे निराश नहीं किया जाता। नेताओं की रैलियों में खूब भीड़ जुटती है। ये हालात तब हैं, जब यहां पीएम मोदी और प्रियंका गांधी रैली कर चुके हैं। मतदाता पूरी तरह शांत हैं। दोनों पार्टियों द्वारा जो चुनावी सपने दिखाए जा रहे हैं, वे उन्हें देख रहे हैं। शाम को कार्यालयों की छुट्टी होने के बाद जब सरकारी कर्मचारी चार-पांच के समूह में एकत्रित होकर माल रोड से गुजर रहे थे तो उनकी जुबान पर 'ओपीएस' का जिक्र था। हालांकि, उन्होंने कैमरे के सामने कुछ भी बताने से मना कर दिया। चलते-चलते एक कर्मचारी ने कहा, यहां 'व्यापारी' और 'कर्मचारी' खामोश हैं। वजह, न तो 'लाला' को अपना काम-धंधा चौपट कराना है और न ही कोई कर्मचारी किसी अच्छे स्टेशन से चंबा या लाहौल-स्पीति जाने का इच्छुक है।

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वेतन देने के लिए तो पैसे हैं नहीं, प्रदेश कर्जे में डूबा है...  

सोलन के माल रोड पर शाम को नो एंट्री लागू होने के बाद दर्जनों लोगों से बातचीत करने का प्रयास किया गया, लेकिन अधिकांश मतदाताओं ने चुप्पी साध ली। वे बहुत कुछ बताना चाह रहे थे, लेकिन कैमरे के सामने नहीं। मुश्किल से व्यापारी यशपाल बिट्टू अपनी बात कहने को तैयार हुए। जब उनसे पूछा गया कि एक पार्टी सत्ता में आने के बाद 'ओपीएस' लागू करेगी।  बिट्टू ने कहा, ये कैसे लागू करेंगे? पेंशन कहां से देंगे? वेतन देने के लिए तो पैसे हैं नहीं। हिमाचल प्रदेश तो पहले ही कर्जे में डूबा पड़ा है। राजनीतिक दल सिर्फ 'मीठी' गोली दे रहे हैं। यह एक ऐसा राज्य है, जहां केंद्र के बिना कुछ नहीं मिलेगा। स्टेट तो खाली पड़ा है। कभी 1500 रुपये देने की बात कहते हैं तो कभी पुरानी पेंशन बहाली का वादा कर रहे हैं। यह केवल वोट की राजनीति हो रही है। कर्मचारियों को गुमराह किया जा रहा है। वे भी जानते हैं कि पुरानी पेंशन नहीं मिलने वाली। पीएम मोदी ने कहा है कि पहले अपने पैरों पर खड़े हो जाओ। उसके बाद कुछ मिलेगा। इस चुनाव में पांच साल वाला रिवाज तो पक्का टूटेगा। डबल इंजन की सरकार है तो उसका फायदा मिलना भी तय है।  

लोगों ने दोनों नेताओं के भाषण का पूरा मजा लिया

सोलन में बन रहे फ्लाईओवर के पास मिले मोहन लाल ने कहा, राजनेता जैसा बोलते हैं, वैसा कुछ करते नहीं। यही वजह है कि इस बार मतदाता चुनाव में दिलचस्पी नहीं ले रहे। पीएम मोदी और प्रियंका गांधी सोलन आ चुके हैं। यहां के लोगों ने दोनों नेताओं के भाषण का पूरा मजा लिया। किसी को निराश नहीं किया। पुरानी पेंशन लागू कराने के लिए कर्मचारी संघर्ष कर रहे हैं, ये ठीक बात है। यहां अहम तथ्य यह है कि इसके लिए बजट कहां से आएगा? ओपीएस केवल एक शिगूफा है। हां, यह बात सही है कि कर्मचारी वर्ग, इस मुद्दे पर कांग्रेस का साथ दे रहा है। छह नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां रैली की थी। उन्होंने सोलन के मनोहर लाल चने वाले, पीडब्ल्यूडी के चौकीदार खड़क बहादुर व सुंदर लाल का जिक्र किया। ऐसा करके पीएम ने खुद को सरकारी कर्मचारियों से जोड़ने का प्रयास किया। मोदी बोले, मैंने सोलन में बहुत समय बिताया है। जब मैं हिमाचल प्रदेश का प्रभारी था तो सोलन ने मुझे खूब इज्जत दी और खूब खिलाया भी।   
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हिमालय की बर्फ में इंदिरा गांधी की अस्थियां

प्रियंका गांधी ने 14 अक्तूबर को सोलन में पहली 'परिवर्तन प्रतिज्ञा' रैली की। उन्होंने भी अपनी दादी का नाम लेकर खुद को लोगों से जोड़ने का प्रयास किया। प्रियंका बोलीं- हिमालय की बर्फ में मेरी दादी स्व. इंदिरा गांधी की अस्थियां भी हैं। वह हिमाचल के लोगों के हौसले से भली भांत वाकिफ थी। उन्होंने कहा, राज्य में कांग्रेस की सरकार बनते ही एक लाख युवाओं को नौकरियां दी जाएंगी। सरकार का दूसरा फैसला, सरकारी कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) की बहाली रहेगा। महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये दिए जाएंगे। प्रियंका ने कहा, कांग्रेस और हिमाचल के लोगों का गहरा और अटूट रिश्ता है। सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन स्कीम को भाजपा की केंद्र सरकार ने बंद किया था। सोलन में दो बार जीत दर्ज करा चुके कांग्रेस प्रत्याशी धनी राम शांडिल अब तीसरी बार चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने राजेश कश्यप को टिकट दिया है। वर्ष 2012 और 2017 के चुनाव में कांग्रेस ने इस सीट पर जीत दर्ज की थी। 
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