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हिमाचल में बजा चुनावी बिगुल 9 नवंबर को मतदान 18 दिसंबर को वोटों की गिनती

Thu, 12 Oct 2017 08:15 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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चुनाव आयोग ने हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के कार्यक्रम घोषित कर दिए हैं। राज्य में एक चरण में 9 नवंबर को मतदान होगा तो वोटों की गिनती 18 दिसंबर को होगी। चुनाव के लिए नामांकन पत्र भरने का सिलसिला 16 अक्टूबर से शुरू होगा। 
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आयोग ने राज्य के सभी मतदान केंद्रों पर वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रायल (वीवीपैट) मशीन के इस्तेमाल का फैसला किया है। इस कारण यह सूबा सभी मतदान केंद्र में वीवीपैट मशीन इस्तेमाल करने वाला पहला सूबा होगा। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार ज्योति ने चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि निष्पक्ष चुनाव केलिए आयोग हर संभव उपाय करेगा। राज्य में बड़े पैमाने पर अर्द्घसैनिक बलों की नियुक्ति के अलावा सभी मतदान केंद्रों को ग्राउंड फ्लोर पर रखा जाएगा। नामांकन, सभी 7521 मतदान केंद्र, चुनावी सभाओं के साथ साथ सभी मतगणना हॉल की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी की जाएगी। आयोग ने प्रत्याशी के लिए खर्च की सीमा 28 लाख रुपये निर्धारित की है।
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 पढ़ें- क्या है VVPAT मशीन? पहली बार किसी राज्य के चुनाव में होगी इस्तेमाल

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि आयोग की टीम सोशल मीडिया के साथ-साथ पेड न्यूज पर भी पैनी नजर रखेगी। इसके लिए आयोग ने जिला, राज्रू और केंद्रीय चुनाव आयोग तक त्रिस्तरीय निगरानी समिति का गठन किया है। परिणामों की घोषणा के 30 दिन के अंदर उम्मीदवारों को अपने खर्च से संबंधित शपथ पत्र सौंपना होगा।
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पहली बार पूरे राज्य में वीवीपैट

इस साल उत्तर प्रदेश सहित 5 राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठे थे। यही कारण है कि आयोग ने भविष्य में सारे चुनावों में वीवीपैट के इस्तेमाल की घोषणा की। इसके जरिए अब मतदाता मतदान के बाद पर्ची के जरिए जान सकेंगे कि उनका वोट सही उम्मीदवार को गया है या नहीं। ज्योति के मुताबिक वीवीपैट पर्ची की रैंडम सैंपलिंग होगी। मतदाता वोट देने के बाद 7 सेकेंड के लिए वीवीपैट पर्ची देख सकेगा।

वीरभद्र के समक्ष सत्ता बचाए रखने की चुनौती
तमाम विवादों और किंतु-परंतु के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में ही चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है। राज्य का रिकार्ड छह बार मुख्यमंत्री रह चुके वीरभद्र के लिए जहां एक ओर सत्ता बचाए रखने की चुनौती है तो दूसरी ओर 7वीं बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर भी। हिमाचल में पिछले कुछ दशकों से हर बार सत्ता विरोधी लहर के कारण सत्ता में परिवर्तन का ट्रेंड रहा है। ऐसे में सत्ता बचाने के लिए वीरभद्र को सत्ता विरोधी रुझान से पार पाना होगा। वह भी तब जब वह खुद और उनके परिवार के सदस्य भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे हैं।

मोदी का करिश्मा और भ्रष्टाचार होंगे भाजपा के हथियार
बीते लोकसभा चुनाव में पीएम नरेंद्र मोदी लहर में राज्य की सभी लोकसभा सीटें जीतने वाली भाजपा इस बार भी पीएम को ही केंद्र में रख कर चुनाव लड़ेगी। वीरभद्र और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला पार्टी का मुख्य मुद्दा होगा।

पहले पार्टी की योजना स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर चुनाव मैदान में उतरने की थी। मगर बाद में इस कारण गुटबाजी शुरू होने की आशंका के कारण पार्टी ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है। पार्टी नेतृत्व को डर है कि नड्डा को आगे करने की स्थिति में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों प्रेम कुमार धूमल और शांता कुमार समर्थक गुट की ओर से परेशानी खड़ी की जा सकती है। ऐसे में ज्यादा संभावना चुनाव जीतने के बाद बतौर मुख्यमंत्री नड्डा का नाम घोषित होने की है।

ये है चुनाव कार्यक्रम
नामांकन 16 अक्टूबर से 23 अक्टूबर
नामांकन पत्र की जांच 24 अक्टूबर
नाम वापसी की आखिरी तारीख 26 अक्टूबर
मतदान 9 नवंबर
मतगणना 18 दिसंबर

अगले हफ्ते घोषित होगा गुजरात का कार्यक्रम
गुजरात विधानसभा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा अगले हफ्ते होने की संभावना है। आयोग के सूत्रों के मुताबिक फिलहाल इस सूबे की चुनावी तैयारियों की अंतिम समीक्षा नहीं हुई है। इसी कारण चुनाव कार्यक्रम की घोषणा टाल दी गई। माना जा रहा है कि गुजरात में दिसंबर के दूसरे हफ्ते में दो चरणों में मतदान कराए जाएंगे।
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