हिमाचल में शिमला-कालका लाइन क्षतिग्रस्त
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हिमाचल प्रदेश में पिछले कुछ दिनों से जारी मूसलाधार बारिश की वजह से भारी क्षति हुई है। प्रदेश में बारिश के कहर में मरने वालों की संख्या बुधवार को 60 हो गई। भारी बारिश के बीच शिमला का प्राचीन शिव मंदिर ढह गया जिसमें एक दर्जन से ज्यादा लोगों की जान चली गई। वहीं, करीब 120 साल पुरानी शिमला-कालका लाइन को भी नुकसान पहुंचा है। नवंबर में इस लाइन को शुरू हुए 120 साल हो जाएंगे।
हिमाचल में भारी बारिश से अब तक कितना नुकसान पहुंचा है? राज्य में भारी बारिश की वजह क्या है? आगे मौसम कैसा रहेगा? जिस शिमला-कालका लाइन को नुकसान हुआ है उसका इतिहास क्या है? बारिश से ढहे शिव मंदिर की क्या मान्यता है? आइये समझते हैं...
कालका-शिमला नेशनल हाईवे
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सबसे पहले जानिए आखिर हिमाचल में क्या हो रहा है?
हिमाचल प्रदेश में रविवार से भारी बारिश हो रही है। पिछले चार दिन में भारी बारिश में 157 प्रतिशत की वृद्धि के कारण पूरे राज्य में भारी क्षति हुई है। इस महीने के 14 दिनों में सोमवार तक प्रदेश में सामान्य स्तर 140.20 मिमी के मुकाबले 147.40 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो पांच फीसदी अधिक है। सोमवार को महज 24 घंटे में कांगड़ा में 273 मिमी बारिश हुई, जबकि सुजानपुर में 254 मिमी, धर्मशाला में 250 मिमी, जोगिंदरनगर में 175 मिमी, सुंदरनगर में 168 मिमी और शिमला में 126 मिमी बारिश हुई। मंडी में 139.6 मिलीलीटर, शिमला एइआरओ में 131.6, शिमला में 126.0 डलहौजी में 83.0 और बिलासपुर में 80.2 वर्षा दर्ज की गई है।
कुल्लू में पेड़ गिरा।
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बारिश के कारण क्या नुकसान हुआ है?
भारी बारिश और भूस्खलन की घटनाओं ने राज्य के कई हिस्सों में विद्युत और जलापूर्ति को बाधित कर दिया। भूस्खलन के कारण राज्य में कम से कम 800 सड़कें अवरुद्ध हैं और इस मानसून सीजन में राज्य को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
भारी वर्षा के कारण शिमला के समर हिल, कृष्णा नगर और फागली में भूस्खलन हुआ है। रविवार से भूस्खलन में दर्जनों लोगों की मौत हो गई है, जबकि बुधवार सुबह समर हिल में एक और भूस्खलन की सूचना मिली है। प्रदेश में भूस्खलन और बाढ़ के कारण इस सप्ताह अब तक कम से कम 60 लोगों की मौत हो चुकी है।
समर हिल में मलबे से 13 शव बरामद किए गए हैं, फागली से पांच और कृष्णा नगर से दो शव बरामद किए गए हैं। सोमवार को ढहे मंदिर के मलबे में कई अन्य लोगों के दबे होने की आशंका है। उधर मंगलवार शाम शिमला के कृष्णा नगर में भूस्खलन से करीब आठ घर बह गए, जिससे दो लोगों की मौत हो गई। कई अन्य मकान खाली करा लिए गए। सोलन जिले में बादल फटने की घटना में सोमवार को सात लोगों की मौत हो गई।
शिमला के समरहिल में तबाही।
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शिमला में ढहा पुराना शिव मंदिर
प्रदेश में भारी बारिश के बीच सोमवार को शिमला में वर्षों पुराना शिव बाड़ी मंदिर ढह गया। राजधानी के समरहिल और फागली में दोनों जगह शिमला-कालका रेल लाइन पर हुए भूस्खलन के कारण निचली ओर बने शिवमंदिर और ढारे मलबे में दब गए। सावन का सोमवार होने के कारण सुबह से ही समरहिल के शिवमंदिर में लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी। भारी बारिश के चलते सुबह 7:15 बजे धमाके के साथ भारी मलबा पेड़ों समेत मंदिर पर जा गिरा। इससे यह मंदिर पूरी तरह से मलबे में दब गया। जो लोग मंदिर पहुंचे थे, उन्हें भागने तक का मौका नहीं मिला। समर हिल इलाके में 14 अगस्त को हुए भारी भूस्खलन के बाद एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सेना, स्थानीय पुलिस और होम गार्ड द्वारा बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
दो सौ साल पुराना है शिव मंदिर का इतिहास
समरहिल के एंदड़ी क्षेत्र में भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटना में तबाह हुए शिव बावड़ी मंदिर का इतिहास करीब दो सौ साल पुराना है। बताया जाता है कि इसका निर्माण गोरखा शासकों के समय में हुआ था। बावड़ी शिव के लिए समर्पित थी। मंदिर तपस्या और अराधना के लिए उपयुक्त स्थान था, इसमें नियमित रूप से साधु आते रहते थे। बाद में मंदिर परिसर में बनी बावड़ी हिंदुओं के लिए तीर्थ स्थल बन गया। मंदिर में वर्तमान में मंदिर में पूजा अर्चना का कार्य गढ़वाल के तीन पुजारी करते हैं। मंदिर की एक अलग कमेटी भी बनी है। मंदिर की बावड़ी को लेकर मान्यता है कि यहां निसंतान दंपती पूजा अर्चना करे तो संतान प्राप्ति होती है। बावड़ी के पानी में भक्त स्नान करने आते हैं। इससे चर्म रोग भी दूर हो जाते हैं। नगर में पूर्व में समरहिल से पार्षद रहे राजीव ठाकुर ने बताया कि शिव बावड़ी मंदिर का इतिहास सौ से डेढ़ सौ साल पुराना है।
कालका-शिमला रेल पटरी हवा में लटकी।
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भूस्खलन से कालका-शिमला रेल ट्रैक क्षतिग्रस्त
शिमला में समरहिल के पास भूस्खलन के चलते विश्व धरोहर कालका-शिमला रेल मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। रेल पटरी हवा में लटक गई है। करीब 120 साल पुराना ऐतिहासिक कालका-शिमला रेलवे मार्ग पर ट्रेनों की आवाजाही ठप हो गई हैं। यह पहली बार है जब कालका-शिमला ट्रैक को इतना बड़ा नुकसान हुआ है।
कालका-शिमला रेल मार्ग
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इस लाइन का क्या महत्व है?
1898 और 1903 के बीच यह रेल लाइन तैयार की गई। नौ नवंबर, 1903 को कालका-शिमला रेलमार्ग की शुरुआत हुई थी। 1896 में इस रेल मार्ग को बनाने का कार्य दिल्ली-अंबाला कंपनी को सौंपा गया था। रेलमार्ग कालका स्टेशन 656 (मीटर) से शिमला (2,076) मीटर तक जाता है। 96 किमी लंबे रेलमार्ग पर 18 स्टेशन हैं। कालका-शिमला रेलमार्ग को केएसआर के नाम से भी जाना जाता है। 1921 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी इस मार्ग से यात्रा की थी।
कालका-शिमला रेल मार्ग
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इसलिए खास है कालका-शिमला रेललाइन
कालका-शिमला रेललाइन पर 103 सुरंगें सफर को रोमांचक पैदा करती हैं। बड़ोग रेलवे स्टेशन पर 33 नंबर बड़ोग सुरंग सबसे लंबी है। इसकी लंबाई 1143.61 मीटर है। सुरंग क्रॉस करने में टॉय ट्रेन ढाई मिनट का समय लेती है। रेलमार्ग पर 869 छोटे-बड़े पुल हैं। पूरे रेलमार्ग पर 919 घुमाव आते हैं। तीखे मोड़ों पर ट्रेन 48 डिग्री के कोण पर घूमती है। कालका-शिमला रेलमार्ग नैरोगेज लाइन है। इसमें पटरी की चौड़ाई दो फीट छह इंच है।
कालका-शिमला रेल मार्ग
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2008 में मिला था विश्व धरोहर का दर्जा
कालका-शिमला रेललाइन के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने जुलाई 2008 में इसे वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया था। कनोह रेलवे स्टेशन पर ऐतिहासिक आर्च गैलरी पुल 1898 में बना था। शिमला जाते यह पुल 64.76 किमी पर मौजूद है। आर्च शैली में निर्मित चार मंजिला पुल में 34 मेहराबें हैं।
जब वी मेट
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बॉलीवुड के लिए आकर्षण का केंद्र रही है रेललाइन
कालका-शिमला रेललाइन बॉलीवुड के लिए आकर्षण का केंद्र रही है। 1974 में सुपरहिट फिल्म 'दोस्त' का गाना 'गाड़ी बुला रही है' इसी मार्ग पर फिल्माया गया था। 1960 में शम्मी कपूर की फिल्म 'ब्वाय फ्रेंड' का गाना 'मुझको अपना बना लो...' कालका-शिमला रेलमार्ग पर शूट हुआ था। साल 2000 में प्रीति जिंटा की फिल्म 'क्या कहना' के साथ 'ऑल इज वेल', 'जब वी मेट', 'सनम रे' और 'रमैया वस्तावेया' जैसी फिल्मों की शूटिंग इस ट्रैक पर हो चुकी है।
भूस्खलन।
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हिमाचल में क्यों हो रही है भारी वर्षा?
इस मानसून सीजन में हिमाचल प्रदेश में बादल फटने और भूस्खलन की कुल 170 घटनाएं सामने आई हैं और लगभग 9,600 घर आंशिक या पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पिछले महीने भी राज्य में भारी बारिश के कारण भूस्खलन और बाढ़ के कारण 130 लोगों की जान चली गई थी।
फिलहाल मानसून कमजोर हो रहा है और मौसम विभाग ने मैदानी इलाकों में कम बारिश की भविष्यवाणी की है क्योंकि मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर गंगा के मैदानी इलाकों से होकर बंगाल की खाड़ी तक गुजर रही है।
आईएमडी के महानिदेशक एम. महापात्रा ने कहा कि मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति के उत्तर में है और वर्तमान में हिमालय की तलहटी के ऊपर है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से भारी बारिश हो रही है, इसलिए इसका प्रभाव हुआ है।
वहीं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव एम राजीवन ने बताया कि हिमालय में भारी बारिश की आशंका थी क्योंकि मानसून अंतराल के दौरान मानसून ट्रफ उत्तर की ओर तलहटी के करीब चला जाता है, जिससे पहाड़ी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश होती है।