मानसून के दौरान ला-नीना और एमजेओ मिलकर बारिश को बढ़ा देते हैं। यहां तक कि एमजेओ अलनीनो के बारिश पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को भी खत्म कर देता है। एमजेओ का परिमाण इसकी केंद्र से दूरी के समानुपाति होता है। एमजेओ का एक अंदरूनी और एक बाहरी घेरा होता है। जब तक यह अंदरूनी घेरे में रहता है, इसका असर काफी कम रहता है। बाहरी घेरे में आते ही यह मौसम में बदलाव लाना शुरू कर देता है।
चार दिन से हिंद महासागर में है एमजेओ
चार दिन से एमजेओ हिंद महासागर में है। इसी वजह से इंडोनेशिया, श्रीलंका, मालद्वी और दक्षिण भारत में बारिश हुई है। अगले कुछ दिन तक इन देशों में बारिश के आसार बने रहेंगे। इसके बाद यह अंदरूनी घेरे में लौट जाएगा। इसके बाद जून में एक बार फिर यह हिंद महासागर के ऊपर होगा। तब तक दक्षिण-पश्चिमी मानसून भी भारत के ऊपर तैयार होगा। जून तक ला-नीना भी शांत रहेगा। ठीक तभी एमजेओ बाहरी घेरे में आकर सक्रिय हो जाएगा और पूरे भारत पर जमकर बारिश होगी। वहीं स्काईमेट वेदर भी जून में 111 फीसदी बारिश का पूर्वानुमान जता चुका है।