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CRPF: BSF-ITBP के बाद सीआरपीएफ इंस्पेक्टरों के हक में आया हाईकोर्ट का फैसला, क्या सरकार देगी ये वित्तीय फायदा

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सीआरपीएफ - फोटो : ANI
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केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में वित्त मंत्रालय का 2008 में जारी हुआ एक कार्यालय ज्ञापन (ओएम) लागू नहीं किया जा रहा। ये 'ओएम', केंद्र सरकार के बाकी सभी विभागों में तो लागू होता है, लेकिन केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के इंस्पेक्टरों को इससे बाहर रखा जा रहा है। इस ओएम में कहा गया है कि जिन कर्मियों का 48 सौ रुपये का 'ग्रेड पे' है और वे उसमें चार साल की सेवा कर चुके हैं तो उनका 'ग्रेड पे' 54 सौ रुपये हो जाएगा। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में इस नियम को लागू कराने के लिए निरीक्षकों को अदालत की शरण लेनी पड़ रही है। सबसे पहले आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने यह लड़ाई जीती थी। उसके बाद बीएसएफ के इंस्पेक्टर भी अदालत पहुंचे। उन्हें भी जीत मिली। अब सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर 'जीडी' और 'फार्मासिस्ट' को भी दिल्ली हाईकोर्ट में जीत मिली है। दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस हरि शंकर और ओम प्रकाश शुक्ला ने अपने फैसले में कहा, आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार के केस की तर्ज पर सीआरपीएफ के इंस्पेक्टरों को भी उक्त वित्तीय फायदा दिया जाए। दिल्ली हाईकोर्ट ने आठ सप्ताह के भीतर यह फैसला लागू करने के लिए कहा है। 
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14 साल से नहीं मिल रही पदोन्नति
सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर सुरेश कुमार यादव एवं अन्य 'रिट पिटीशन संख्या 6179/2025' के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने यह अहम फैसला दिया है। पहले इस मामले की सुनवाई 14 अक्तूबर को होनी थी, लेकिन किन्हीं कारणों से वह सुनवाई टल गई। जस्टिस हरि शंकर और ओम प्रकाश शुक्ला ने 15 अक्तूबर को इस मामले की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। इससे अगले दिन यानी 16 अक्तूबर को रिट पिटीशन संख्या 16003/2025 सीताराम बरवाल एवं अन्य को लेकर भी दिल्ली हाईकोर्ट ने यही फैसला दिया है। यह केस, सीआरपीएफ के दो सौ से ज्यादा इंस्पेक्टरों 'फार्मासिस्ट' ने किया था। दूसरे केस में सीआरपीएफ के 70 से ज्यादा इंस्पेक्टर 'जीडी' शामिल हैं। इस केस में वरिष्ठ अधिवक्ता अंकुर छिब्बर और निकुंज अरोड़ा के साथ तमाल सान्याल बतौर सहयोगी की भूमिका में रहे। सीआरपीएफ इंस्पेक्टरों को एक ही रैंक में काम करते हुए लगभग 14 साल हो गए हैं, लेकिन उन्हें पदोन्नति नहीं मिल रही। खास बात है कि इन्हें पदोन्नति देना तो दूर की बात, 54 सौ रुपये का ग्रेड पे भी नहीं दिया गया। इस हक के लिए भी केंद्रीय बलों के इंस्पेक्टरों को अदालत की शरण लेनी पड़ रही है। 

आईटीबीपी इंस्पेक्टर ने सबसे पहले जीती यह लड़ाई
सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट में चली लंबी सुनवाई और अवमानना याचिकाओं के बाद आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने सबसे पहले यह लड़ाई जीत ली थी। उसके बावजूद सुशील कुमार को अभी तक पूरी तरह से फायदा नहीं मिल सका। मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अवमानना याचिका के इस मामले में 15 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्रालय के जेएस (पी) को सुनवाई में हाजिर रहने का आदेश दिया था, लेकिन उससे पहले ही आईटीबीपी ने इंस्पेक्टर सुशील कुमार को 54 सौ रुपये का ग्रेड पे देने का आदेश जारी कर दिया। आईटीबीपी ने अपने आदेश में कहा कि विभाग की लीगल सेल, आईटीबीपी और संबंधित मंत्रालय के साथ चर्चा कर यह निर्णय लिया गया है कि इंस्पेक्टर सुशील कुमार को '5400' रुपये का ग्रेड पे, पीबी 3 और लेवल 10 में 'व्यक्तिगत रूप' से दिया जाए। यानी ये आदेश केवल सुशील कुमार पर ही लागू होगा। अगर इस केस में अन्य याचिकाकर्ता हैं तो उन्हें यह फायदा नहीं मिलेगा। साथ ही आईटीबीपी की तरफ से कहा गया है कि याचिकाकर्ता को पीबी 2 या पीबी 3 में यह फायदा दिया जाए, ये सुप्रीम कोर्ट में जो समीक्षा याचिका लगी है, उसके फैसले पर निर्भर करेगा। 

हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
पिछले साल 48 सौ रुपये के 'ग्रेड पे' को लेकर आईटीबीपी के इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने दिल्ली कोर्ट से यह लड़ाई जीती थी, लेकिन अभी तक उन्हें इसका पूरा फायदा नहीं मिल सका। वजह, केंद्र सरकार, दिल्ली उच्च न्यायालय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चली गई। वहां पर एसएलपी खारिज हो गई। इसके बावजूद याचिकाकर्ता को न्याय नहीं मिला। अवमानना याचिका पर आईटीबीपी के आईजी 'पर्स' 26 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष वीसी के जरिए पेश हुए थे। उन्होंने बताया कि यह मामला, गृह मंत्रालय के समक्ष प्रस्तावित है। उच्च न्यायालय ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के जेएस (पी) को अगली सुनवाई में हाजिर रहने का आदेश दे दिया था। 

दिल्ली हाईकोर्ट में दिए गए थे ये तर्क
आईटीबीपी निरीक्षक के मामले में अदालत की सुनवाई में बताया गया कि वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग ने 29 अगस्त 2008 को एक कार्यालय ज्ञापन जारी किया था। इसमें कहा गया था कि जिन कर्मियों का 48 सौ ग्रेड पे है और उन्होंने चार साल की नौकरी कर ली है, तो उनका ग्रेड पे 54 सौ हो जाएगा। इस मामले में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स 'सीबीडीटी' में कार्यरत कर्मियों को यह फायदा नहीं मिला। इस मामले में सीबीडीटी के इंस्पेक्टर एम सुब्रमणयम, '167/2009' कैट में चले गए। कैट ने भी इंस्पेक्टर के पक्ष में फैसला नहीं दिया। उसके बाद एम सुब्रमणयम, मद्रास हाईकोर्ट '13225/2010' में चले गए। सरकार ने अदालत में कहा, आपको ये लाभ नहीं मिलेगा। जो पदोन्नत होकर आए हैं, उन्हीं को ये लाभ मिलेगा। मद्रास हाईकोर्ट ने कहा, उक्त कर्मचारी को यह लाभ दिया जाए। 
 

और सरकार, सुप्रीम कोर्ट में चली गई 
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ, केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट 8883/2011 में चली गई। सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद सरकार को लताड़ लगाई। मद्रास हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा। केंद्र सरकार, इसके बाद भी संबंधित कर्मचारी को फायदा देने के लिए तैयार नहीं हुई। सरकार की अपील भी 10 अक्तूबर 2017 को डिसमिस हो गई। सरकार ने एक नहीं, बल्कि दो रिव्यू दो पेटिशन किए थे। ये भी 23 अगस्त 2018 को डिसमिस कर दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इस मामले में जो एसएलपी रिजेक्ट की गई थी, केस का वही स्टे्टस रहेगा। इसके बाद सीबीडीटी ने भी सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर कर लिया। 

सरकार ने कहा, 'ग्रुप बी' में ही लागू होगा
सुप्रीम कोर्ट में याचिका रद्द होने के बाद केंद्र सरकार ने ग्रुप 'बी' में यह आदेश लागू कर दिया। मतलब, वित्त मंत्रालय के 2008 में जारी कार्यालय ज्ञापन 'ओएम' के अनुसार, जिन कर्मियों का 48 सौ रुपये का ग्रेड पे है और उन्होंने चार साल की नौकरी कर ली है, उनका ग्रेड पे 54 सौ रुपये हो जाएगा, ये फायदा दे दिया। सरकार ने कहा, यह आदेश केवल ग्रुप बी वालों के लिए ही लागू होगा। हालांकि यह 'पे ग्रेड' तो 'ग्रुप ए' में भी आता है, लेकिन 'ग्रुप बी' में ही ये फायदा दिया गया। इसके पीछे वजह बताई गई कि 'ग्रुप बी' में कमजोर वर्ग है, उन्हें आर्थिक तौर पर सफल बनाना है। केंद्र सरकार ने उस वक्त एक नई शर्त लगा दी। सरकार ने कहा, सभी को ये फायदा नहीं मिलेगा, केवल पदोन्नति वालों को ही दिया जाएगा। खास बात है कि केंद्र सरकार ने सभी विभागों में यह फायदा दिया, लेकिन अर्धसैनिक बलों को इससे बाहर रखा। ग्रुप बी 'सिविल' वालों को लाभ मिला, लेकिन केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को नहीं दिया। 

आईटीबीपी को भेजा गया था लीगल नोटिस
आईटीबीपी इंस्पेक्टर 'फार्मासिस्ट' सुशील कुमार ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। उसमें कहा गया कि मद्रास उच्च न्यायालय ने इस केस में फैसला दिया है। हरियाणा एवं पंजाब हाईकोर्ट ने भी इस केस में फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित रखा है। सुशील कुमार ने उक्त फैसलों के आधार पर 21 जून 2020 को आईटीबीपी को लीगल नोटिस भेजा था। बल ने उसे 18 सितंबर 2020 को रिजेक्ट कर दिया। उसके बाद 43321/2021 रिट पेटिशन किया। दिल्ली हाईकोर्ट ने यह कहकर पेटिशन को डिस्पोज कर दिया कि विभाग इस रिट पेटिशन को ही प्रतिवेदन मानें। इसी पर एक विस्तारित आदेश जारी करें। इसके बावजूद विभाग ने प्रतिवेदन को 24 सितंबर 2021 को रिजेक्ट कर दिया। उसके बाद रिट पेटिशन हाईकोर्ट में लगाई गई। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने आईटीबीपी से कहा, आठ सप्ताह में याचिकाकर्ता को वित्त मंत्रालय के 2008 में जारी कार्यालय ज्ञापन 'ओएम' के अनुसार, फायदा दिया जाए। ये फायदा, छह जुलाई 2019 से देना होगा। 

बीएसएफ के 129 इंस्पेक्टरों को मिली जीत
54 सौ रुपये के 'ग्रेड पे' के मामले में बीएसएफ और सीआरपीएफ के इंस्पेक्टर भी दिल्ली हाईकोर्ट में पहुंच गए। बीएसएफ के 129 इंस्पेक्टरों के मामले में हाईकोर्ट ने कहा था कि 24 सितंबर से पहले 5400 का 'ग्रेड पे' लागू नहीं होता है तो विभाग के संबंधित अफसर दिल्ली हाईकोर्ट में मौजूद रहें। कानून के जानकारों के मुताबिक, इस मामले में सरकार के पास अब कोई ज्यादा विकल्प नहीं बचा है। एसएलपी खारिज हो चुकी है। अब इस मामले में यह संभावना तलाशी जा रही है कि जिस याचिकाकर्ता के पक्ष में हाईकोर्ट का फैसला आया है, केवल उसे ही फायदा दे दिया जाए। आईटीबीपी इंस्पेक्टर सुशील कुमार के मामले में भी यही हुआ है। दिल्ली हाईकोर्ट ने बीएसएफ के इंस्पेक्टरों के हक में फैसला दिया। नतीजा, केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में चली गई, लेकिन वहां पर एसएलपी खारिज हो गई। इसके बावजूद अभी तक याचिकाकर्ताओं को न्याय नहीं मिल रहा। उन्हें अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ रही है।
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केंद्रीय गृह मंत्रालय से उचित दिशा निर्देश की अपील
डीजी बीएसएफ ने अपने इंस्पेक्टरों के मामले में 14 मई को केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ संचार किया था। इसमें कहा गया कि सुशील कुमार के केस में दिल्ली हाईकोर्ट ने 9 सितंबर 2024 को फैसला सुनाया था। उसे सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी 13406/2025 के जरिए चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने 17 अप्रैल के अपने फैसले में एसएलपी को खारिज कर दिया। इस मामले में बीएसएफ के लीगल अफसरों की राय ली गई। उन्होंने अपनी राय में कहा, अब दिल्ली हाईकोर्ट का आदेश लागू किया जाना जरुरी है। अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। ऐसी स्थिति में एनएफयू का जो केस है यानी बीएसएफ इंस्पेक्टर आनन्द प्रताप सिंह का, उसे 54 सौ का 'ग्रेड पे' दे दिया जाए। डीजी ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय से उचित दिशा निर्देश जारी करने की प्रार्थना की थी।
 
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