यूपी में नागरिक पुलिस और पीएसी में 4010 सबइंस्पेक्टर तथा प्लाटून कमाडेंट की भर्ती में विशेष आरक्षित वर्ग (महिला, एक्स सर्विस मैन और सेनानी आश्रित) को सामान्य वर्ग की सीटों में नियुक्ति देने का निर्णय रद्द करने संबंधी आदेश को हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सही करार दिया है। एकल न्यायपीठ के इस आदेश को चुनौती देने वाली प्रदेश सरकार की विशेष अपील को खारिज करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश वीके शुक्ला और न्यायमूर्ति यूसी श्रीवास्तव की खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को आदेश के अनुसार रिजल्ट में तत्काल संशोधन करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने माना कि विशेष आरक्षित वर्ग को मिलने वाला क्षैतिज आरक्षण का लाभ उस वर्ग विशेष के लिए आरक्षित सीटों में ही दिए जाने का नियम है। ऐसा न करके सरकार ने आरक्षण नियमों का उल्लंघन किया है जिससे आरक्षण 50 प्रतिशत से बढ़कर 77 प्रतिशत तक पहुंच गया जो असंवैधानिक है।
एकल पीठ ने गलत आरक्षण लागू करने के लिए प्रत्येक याची के हिसाब से 10 हजार रुपये सरकार पर हर्जाना लगाया था, साथ ही अधिकारियों द्वारा की गई मनमानी पर प्रतिकूल टिप्पणी की थी। खंडपीठ ने हर्जाने और टिप्पणी वाले आदेश के हिस्से को रद्द कर दिया है। विशेष अपील का अधिवक्ता सीमांत सिंह ने विरोध किया। अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया, जीके सिंह आदि पक्षकारों की ओर से बहस की।