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Gujarat HC: चीनी मांझे के इस्तेमाल को रोकने के लिए क्या किया जा रहा है? हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी कार्ययोजना

Tue, 03 Jan 2023 06:53 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद

सार

14 जनवरी को मनाए जाने वाले उत्तरायण पर्व के दौरान पतंग उड़ाने के लिए चाइनीज डोरियों और अन्य सिंथेटिक डोरियों का उपयोग किया जाता है। इसको रेकने के लिए गुजरात हाई कोर्ट ने साल 2017 में सरकार को निर्देश दिया था। हालांकि अदालत के आदेश का व्यापक रूप से पालन नहीं हो रहा था। इसी को लेकर याचिकाकर्ता सिद्धराजसिंह चुडासमा ने याचिका दाखिल की थी। 
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चाइनीज मांझा - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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चाइनीज मांझा के कारण होने वाले हादसों को देखते हुए अदालतें और सरकार इसके प्रयोग पर लगाम लगाने के लिए प्रयासरत हैं। इसी क्रम में मंगलवार को गुजरात हाई कोर्ट ने आमागी उत्तरायण पर्व के दौरान पतंग उड़ाने के लिए 'चीनी मांझे' के इस्तेमाल को रोकने के लिए सरकार से कार्य योजना मांगी है। अदालत ने यह भी कहा कि जनहित को देखते हुए आगामी उत्तरायण पर्व पर चाइनीज मांझे के प्रयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती। 

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गौरतलब है कि 14 जनवरी को मनाए जाने वाले उत्तरायण पर्व के दौरान पतंग उड़ाने के लिए चाइनीज डोरियों और अन्य सिंथेटिक डोरियों का उपयोग किया जाता है। इसको रेकने के लिए गुजरात हाई कोर्ट ने साल 2017 में सरकार को निर्देश दिया था। हालांकि अदालत के आदेश का व्यापक रूप से पालन नहीं हो रहा था। इसी को लेकर याचिकाकर्ता सिद्धराजसिंह चुडासमा ने याचिका दाखिल की थी। 

याचिकाकर्ता सिद्धराजसिंह चुडासमा ने अपने वकील भुनेश रूपेरा के जरिए कहा कि हाई कोर्ट ने 13 जनवरी, 2017 को सरकार को पतंगबाजी के लिए कांच से लिपटे सिंथेटिक धागे और नायलॉन के धागों (चीनी मांजा) के साथ ही किसी भी अन्य के निर्माण, भंडारण और उपयोग को रोकने के लिए हर संभव कदम उठाने के लिए अंतरिम निर्देश दिया था। याचिका कर्ता ने यह दलील भी दी कि अदालत के निर्देश केवल कागज पर थे। उन्हें सख्ती से अमलीजामा नहीं पहनाया गया था। सुनवाई के दौरान वकील ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के एक आदेश का हवाला भी दिया।
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वहीं, सरकार का पक्ष रख रहे वकील ने अदालत को बताया कि 2016 में इस बाबत एक सर्कुलर जारी किया गया था। साथ ही सभी जिलों को इसे लागू करने के लिए कहा गया था।

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति आशुतोष शास्त्री की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह के प्रतिबंध को पूरे देश में मनुष्यों, पक्षियों और जानवरों के जीवन को संरक्षित करने के लिए सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। यह शीर्ष अदालत द्वारा जारी निर्देश है। पीठ ने इस संबंध में कहा कि सरकार बताए कि आदेश को लागू करने के लिए वह क्या कदम उठा रही है। अदालत ने इस मामले को अगली सुनवाई के लिए 6 जनवरी को सूचीबद्ध किया है। 

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