इसलिए बनाई गई एसपीजी
1981 से पहले तक भारत के प्रधानमंत्री और उनके आवास के सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस उपायुक्त के नेतृत्व वाली स्पेशल सिक्योरिटी के हाथों में होती थी। अक्टूबर 1981 में इंटेलिजेंस ब्यूरो
के कहने पर एक स्पेशल टास्क फोर्स का निर्माण किया गया। जो दिल्ली के अंदर और बाहर पीएम को सुरक्षा मुहैया करवाते थे। अक्टूबर 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सुरक्षा गार्ड्स ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। जिसके बाद पीएम की सुरक्षा को लेकर रिव्यू किया गया।
सचिवों की समिति ने पीएम की सुरक्षा का रिव्यू किया। जिसके बाद निर्णय लिया गया कि पीएम की सुरक्षा को एक स्पेशल ग्रुप को दिया जाए जिसमें एक निर्दिष्ट अधिकारी का संगठित और प्रत्यक्ष नियंत्रण हो और एसटीएफ दिल्ली और दिल्ली से बाहर पीएम को तत्काल सुरक्षा देगी। इसी वजह से एसपीजी का गठन हुआ। यह एक स्वतंत्र निर्देशक के अंतर्गत स्थापित किया गया जो दिल्ली, देश और दुनिया के हर कोने में जहां भी प्रधानमंत्री जाएं वहां उनको सुरक्षा प्रदान करेंगे।
क्या होता है खास
पीएम की सुरक्षा में तैनात होने वाले एसपीजी कमांडो को विशेष तरह की ट्रेनिंग दी जाती है। इन्हें पीएम की सुरक्षा में तैनात करने से पहले उनके बारे में सारी जानकारी निकाली जाती है। जैसे कि वह कहां जाते हैं, किससे मिलते हैं आदि। उनके परिवार के सभी सदस्यों को ब्यौरा भी सरकार के पास मौजूद होता है। इन कमांडो के पास एफएनएफ-2000 असॉल्ट राइफल होती है। यह पूरी तरह से ऑटोमैटिक गन है। कमांडोज के पास ग्लोक 17 नाम की एक पिस्टल भी होती है। कमांडो अपनी सेफ्टी के लिए एक लाइट वेट बुलेटप्रूफ जैकेट पहनते हैं और साथी कमांडो से बात करने के लिए कान में लगे ईयरप्लग या फिर वॉकी टॉकी की मदद लेते हैं।
पीएम की सुरक्षा में विभिन्न घेरों के तहत एक हजार से ज्यादा एसपीजी कमांडो तैनात रहते हैं। इन कमांडो को भारतीय सेना और पुलिस बल से चुना जाता है। जिसके बाद इन्हें विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। पीएम की सुरक्षा में तैनात एसपीजी की खासियत यह होता है कि ड्राइवर से लेकर निजी बॉडीगर्ड तक एसपीजी के ही होते हैं। इन्हें चेहरे पर किसी भी तरह के भाव दिखाने की मनाही होती है। इनके पास एफएन हर्सटल फाइव-सेवन बंदूक और ग्लॉक 12 के विशेष तरह के दस्ताने होते हैं जो इन्हें चोट लगने से बचाते हैं।