यूपी के यादव परिवार की कलह सियासी बवंडर साबित हो रही है। राजनेताओं के परिवारों में कलह कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले भी परिवारों में टकराव राजनीतिक दलों के बिखराव की वजह बने हैं। आईए जानते हैं कुछ ऐसे ही मामले जब राजनीतिक महत्वकांक्षा किसी राजनीतिक दल के लिए मुश्किल का सबब बनीं और खूब मचा सियासी धमाल...
एआईएडीएमके (AIADMK) का झगड़ा
1984 में जब स्ट्रोक के बाद एमजी रामाचंद्रन (एमजीआर) की हालत थोड़ी खराब हुई तो कहा जाता है कि जयललिता ने सीएम का पद हासिल करने की कोशिश की। दिसंबर 1987 में एमजीआर की मौत के बाद एआईएडीएमके दो धड़ों में बंट गई- एक धड़ा एमजीआर की पत्नी जानकी का था तो दूसरा जयललिता का। 1989 के राज्य विधानसभा चुनाव में एआईएडीएमके की बुरी तरह हार हुई और जानकी का धड़ा भी जयललिता के धड़े में शामिल हो गया।
टीडीपी में बवाल
चंद्रबाबू नायडू
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1995 में चंद्रबाबू नायडू ने तेलगूदेशम पार्टी (टीडीपी) के संस्थापक एनटी रामा राव के खिलाफ ही चाल चली और उन्हें हटाकर सीएम बन गए। इसके बाद नायडू ने कहा कि एक 'दुष्ट शक्ति' ने (एनटीआर की दूसरी वाइफ लक्ष्मी पार्वती के लिए कहा) पार्टी को बर्बाद करने की कोशिश की और इस 'आसुरी शक्ति' से पार्टी को बचाने के लिए उन्हें विद्रोह करना पड़ा। इसके बाद टीडीपी टूटी। एनटीआर के परिवार वालों ने भी नायडू का समर्थन किया। जनवरी 1996 में हार्ट अटैक से एनटीआर की मौत हो गई। उनकी पत्नी पार्वती ने टीडीपी एनटीआर के नाम एक एक विरोधी गुट बना लिया। दोनों ही, नायडू और पार्वती एनटीआर की विरासत का दावा करते रहे।
डीएमके की फूट
डीएमके
तमिलनाडु की पार्टी डीएमके के सुप्रीमो करुणानिधि को भी दोनों बेटों के बीच की राजनीतिक लड़ाई का गवाह बनना पड़ा। करुणानिधि ने जैसे ही संकेत दिए कि उनका छोटा बेटा एमके स्टालिन पार्टी में उनका उत्तराधिकारी होगा तो बड़े बेटे एमके अलागिरी ने विद्रोह कर दिया। अलागिरी ने पिता पर 'भेदभाव' करने का आरोप लगाया। अलागिरी ने पार्टी के भीतर अपना कद बड़ा करने की खूब कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। 2014 में 'पार्टी विरोधी' गतिविधियों के लिए उन्हें डीएमके बाहर कर दिया गया।
शिवसेना में मचा था घमासान
राज ठाकरे
महाराष्ट्र में शिवसेना में बाल ठाकरे सत्ता का केंद्र हुआ करते थे। 2006 में पार्टी में एक धड़े ने अपना अलग केंद्र बनाने की कोशिश की। इस धड़े के नेता थे शिवसेना चीफ बाल ठाकरे के भतीजे राज ठाकरे। 2006 में ही ठाकरे ने अलग पार्टी 'महाराष्ट्र नवनिर्माण ' बना ली। उन्होंने आरोप लगाया, 'मैंने मातोश्री से सिर्फ सम्मान मांगा लेकिन मुझे केवल अपमान ही मिला।' दरअसल, उद्धव ठाकरे के बढ़ते कद से राज ठाकरे असुरक्षा महसूस करने लगे थे।