राज्यपाल रवि ने 13 नवंबर को बिल वापस लौटाया था। इससे पहले बीते 10 नवंबर को, विधेयकों को मंजूरी देने में तमिलनाडु के राज्यपाल की तरफ से हो रही कथित देरी को सुप्रीम कोर्ट ने "गंभीर चिंता का विषय" करार दिया था। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है।
विधेयकों को मंजूरी देने में राज्यपाल पर जानबूझकर 'देरी' करने के आरोप लग रहे हैं। तमिलनाडु और केरल की सरकारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दोनों सरकारों की अलग-अलग याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज यानी सोमवार को सुनवाई करेगा। दोनों राज्यपालों पर विधानसभाओं से पारित विधेयकों को मंजूरी देने में संबंधित राज्य के राज्यपालों पर बिना किसी वैध कारण के देरी का आरोप लगाया गया है।
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चीफ जस्टिस की पीठ में सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ में याचिकाओं पर सुनवाई होगी। याचिका पर सुनवाई से पहले तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि ने तमिलनाडु में कई विधेयकों को वापस लौटाया। हालांकि, तमिलनाडु विधानसभा ने शनिवार को एक विशेष बैठक में सभी 10 विधेयकों को फिर से अपनाया और मंजूरी के लिए राज्यपाल के पास भेजा। इसमें कानून, कृषि और उच्च शिक्षा सहित विभिन्न विभागों से जुड़े विधेयक हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने लंबित विधेयकों को गंभीर चिंता माना
बता दें कि राज्यपाल रवि ने 13 नवंबर को बिल वापस लौटाया था। इससे पहले बीते 10 नवंबर को, विधेयकों को मंजूरी देने में तमिलनाडु के राज्यपाल की तरफ से हो रही कथित देरी को सुप्रीम कोर्ट ने "गंभीर चिंता का विषय" करार दिया था। शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार की याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है।
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राज्यपाल ने विधेयकों को मंजूरी देने में देर लगाई
शीर्ष अदालत ने केंद्र को नोटिस जारी करते हुए इस मुद्दे को सुलझाने में अटॉर्नी जनरल या सॉलिसिटर जनरल की सहायता मांगी। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा, "रिट याचिका में जो मुद्दे उठाए गए हैं, वे गंभीर चिंता का विषय हैं। सीजेआई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था, मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत गृह मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी कर रही है। पीठ ने कहा था, इस अदालत के समक्ष प्रस्तुत बयानों से, ऐसा प्रतीत होता है कि अनुच्छेद 200 के तहत राज्यपाल के पास भेजे गए लगभग 12 विधेयकों को मंजूरी नहीं दी गई है। कैदियों की समय से पहले रिहाई के प्रस्ताव और लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति जैसे अहम प्रस्ताव लंबित हैं।