सुप्रीम कोर्ट ने इस साल मार्च में निजामुद्दीन में मरकज तब्लीगी जमात कार्यक्रम में शामिल विदेशी नागरिकों की याचिका पर सुनवाई टाल दी है। गृहमंत्रालय द्वारा काली सूची में डाले गए इन विदेशियों ने स्वदेश वापसी के लिए वीजा और पासपोर्ट की बहाली की मांग को लेकर याचिका दायर की है। जस्टिस एएम खालविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि इन विदेशियों के खिलाफ सुनवाई में तेजी लाने के लिए क्या किया जा सकता है। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने सोमवार को पीठ को सूचना दी कि 34 याचिकाकर्ताओं में से 23 दोषी ठहराए गए हैं और उन पर एक तय जुर्माना लगाया गया है। इसलिए ये लोग स्वदेश जाने के लिए आजाद हैं। उन्होंने कहा कि नौ विदेशियों को मुकदमे का सामना करना है और उनके मामले की सुनवाई विभिन्न अदालतों के समक्ष लंबित है।
इस पर पीठ ने उनसे पूछा कि सुनवाई को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए क्या किया जा सकता है। मेहता ने कहा कि वह जांच अधिकारी से बात करेंगे और जल्द सुनवाई के लिए आवेदन दाखिल करने की संभावना का पता लगाएंगे। कई याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सीयू सिंह ने पीठ से आग्रह किया कि इन 23 याचिकाकर्ताओं को जल्द से जल्द घर वापसी की सुविधा मुहैया कराई जानी चाहिए।