फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Health Ministry: एनएमसी की तरह बनेगा राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग, स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुरू की प्रक्रिया

Tue, 19 Mar 2024 07:04 AM IST
यशोधन शर्मा परीक्षित निर्भय

सार

राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग के तहत स्नातक और स्नातकोत्तर दंत चिकित्सा शिक्षा बोर्ड, दंत चिकित्सा मूल्यांकन व रेटिंग बोर्ड और दंत चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड होंगे। देश में पहला डेंटल कॉलेज 1920 में कलकत्ता में खुला था।
विज्ञापन
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश में जल्द ही एमबीबीएस की तरह दंत चिकित्सा शिक्षा के स्वरूप में बदलाव देखने को मिलेगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग (एनडीसी) के गठन की प्रक्रिया शुरू की है जो मेडिकल कॉलेजों के लिए गठित राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) की तरह कार्य करेगा।

विज्ञापन


मंत्रालय की ओर से जारी नियुक्ति आदेश में कहा गया है कि एनडीसी के अधीन तीन अलग-अलग बोर्ड होंगे जो दंत चिकित्सा कॉलेजों को मान्यता देने, शिक्षा में सुधार, मूल्यांकन और रेटिंग के साथ-साथ बीडीएस और एमडीएस के छात्रों के लिए पारदर्शी प्रणाली विकसित करने का कार्य करेंगे। अगले एक महीने में मंत्रालय ने राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग को गठित करने का निर्णय लिया है जो इसी शैक्षणिक सत्र 2024-25 से अपना कार्य शुरू करेगा। इसका हिस्सा बनने के लिए मंत्रालय ने ऐसे विशेषज्ञों को भी अवसर दिया है जिन्होंने ग्रामीण या फिर दुर्गम क्षेत्रों में मरीजों की सेवा की है।

राष्ट्रीय दंत चिकित्सा आयोग के तहत स्नातक और स्नातकोत्तर दंत चिकित्सा शिक्षा बोर्ड, दंत चिकित्सा मूल्यांकन व रेटिंग बोर्ड और दंत चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड होंगे। देश में पहला डेंटल कॉलेज 1920 में कलकत्ता में खुला था। तब से लेकर अब तक देश में करीब 300 से ज्यादा डेंटल कॉलेज हैं जो हर साल 25 हजार से अधिक दंत चिकित्सक तैयार कर रहे हैं।
विज्ञापन


लाइसेंस, नए कॉलेज की स्थापना, फीस तक में बदलाव
गठन के बाद एनडीसी सबसे पहले प्रैक्टिस लाइसेंस, नए कॉलेजों की स्थापना और बीडीएस व एमडीएस कोर्स की फीस तय करेगा। इसके साथ ही एमबीबीएस की तरह बीडीएस को भी नेक्स्ट परीक्षा के दायरे में लाया जाएगा, जिसे उत्तीर्ण करने के बाद ही दंत चिकित्सा करने का लाइसेंस दिया जा सकता है। इसके अलावा, कॉलेजों में हाजिरी प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए आधार आधारित फेस स्कैनर तकनीक पर काम किया जाएगा ताकि कॉलेजों में छात्र और शिक्षकों की सही उपस्थिति का ब्यौरा सार्वजनिक हो सके। इसके अलावा परिवार गोद कार्यक्रम भी लागू किया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें