आवाजाही की बेहतर कनेक्टविटी न होने की वजह से यह अतिसंवेदनशील क्षेत्र है यहां तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कोंगा वागु, इल्का और राला वागु को पैदल सुरक्षित पार किया।
छत्तीसगढ़ में अभी भी कोरोना से जंग जारी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रहे हैं। लोगों को बीमारी से दूर रखने के लिए खुद हर खतरा मोल लेने को तैयार है। कुछ ऐसी ही तस्वीर सामने आई है बीजापुर जिले के नेलाकांकेर, लिंगापुर और मारूड़बाका गांव से। जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम ग्रामीणों को टीका लगाने के लिए एक नहीं बल्कि तीन-तीन नदियों को पार करके पहुंची।
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बने हुए बाढ़ के हालात
छत्तीसगढ़ में अभी भी बारिश हो रही है। बारिश की वजह से घने जंगलों से घिरे बीजापुर जिले के चारों तरफ नदी और नाले उफान पर हैं। इसके बावजूद भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अपनी पूरी ईमानदारी दिखाई। स्वास्थ विभाग की टीम घने जंगल और उफनती नंदियों के बीच से ग्रामीणों को कोविड-19 से बचाव का टीका लगाने पहुंची। नेलाकांकेर, मारूड़बाका और लिंगापुर गांव मारूड़बाका उप स्वास्थ्य केन्द्र के अंतर्गत आते है। इस उप स्वास्थ्य केन्द्र के अंतर्गत 9 गांव आते हैं।
पैदल पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम
आवाजाही की बेहतर कनेक्टविटी न होने की वजह से यह अतिसंवेदनशील क्षेत्र है। यहां तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कोंगा वागु, इल्का और राला वागु को पैदल सुरक्षित पार किया। कीचड़ भरे रास्ते और पहाडि़यों के बीच से विभागीय टीम गांव पहुंची।
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नदियों का बढ़ा हुआ है जलस्तर
इन गांवों की दूरी तय करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम को जंगलो के बीच करीब 50 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ा। नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ। उसके बाद तेज बहाव के बीच से नर्सों की टीम ग्रामीणों को कोविड़ का टीका लगाने पहुंची। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र उसूर से उप स्वास्थ्य केन्द्र मारूड़बाका की दूरी करीब 30 किलोमीटर है। कोविड वैक्सीनेशन की डोज देने ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारी ज्योति सिदार, नागमणी चिलमुल, रमेश गड्डेम और शिक्षक आनन्द राव यालम शामिल थे।