अगले कुछ महीनों में ही भारत दुनिया के नक्शे पर सबसे बड़ा मेडिकल टूरिज्म का हब बनने वाला है। प्रधानमंत्री मोदी के दिशा निर्देशन में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेडिकल टूरिज्म का पूरा ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। मेडिकल वैल्यू ट्रैवल प्लान के तहत दुनिया के 61 देशों को चुना गया है, ताकि वहां के मरीज भारत में आकर बेहतरीन चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर सकें। इसके अलावा सिंगल विंडो कॉन्सेप्ट से दुनिया के अलग-अलग मुल्कों से आने वाले मरीजों को सारी सहूलियत उपलब्ध कराने की भी तैयारी की गई है। पिछले महीने धर्मशाला में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आला अधिकारियों ने मेडिकल टूरिज्म का पूरा ड्राफ्ट प्लान साझा किया।
मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 'हील इन इंडिया' कार्यक्रम के तहत पूरी तैयारियां कर ली गई हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक मेडिकल वैल्यू ट्रैवल प्लान के तहत प्रधानमंत्री मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को देश में आगे बढ़ाया जाना है। इस पूरे मेडिकल टूरिज्म ड्राफ्ट में कई पहलुओं को ध्यान में रखकर मेडिकल वैल्यू ट्रैवल प्लान तैयार किया गया है। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश के अलग-अलग राज्यों के अस्पतालों का चयन किया है। जहां पर दुनिया के अलग-अलग मुल्कों से आने वाले मरीजों का इलाज किया जाएगा। फिलहाल शुरुआती योजना के मुताबिक मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए 12 राज्यों के 17 शहरों के प्रमुख अस्पतालों को शॉर्टलिस्ट किया गया है। जिसमें दिल्ली, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, केरल, महाराष्ट्र, पंजाब, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश और आसाम के प्रमुख चिकित्सा संस्थान शामिल करने का प्रस्ताव बनाया गया है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हील इंडिया कार्यक्रम के तहत मेडिकल टूरिज्म को तीन अहम क्षेत्रों में बांटने की योजना बनाई है। इसमें मॉडर्न मेडिकल ट्रीटमेंट, ट्रेडिशनल मेडिकल थेरेपी समेत वैलनेस और रिजुविनेशन शामिल हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक अभी भी भारत में मेडिकल टूरिज्म के लिहाज से सार्क देशों से सबसे ज्यादा मरीज पहुंच रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि 2019 और 2020 में 553605 मेडिकल वीजा जारी किए गए थे। अनुमान है कि हील इंडिया कार्यक्रम के तहत यह संख्या कई गुना बढ़ने वाली है, बल्कि मेडिकल टूरिज्म के लिहाज से चिकित्सा क्षेत्र में भी बड़ा उछाल आने वाला है। आंकड़े बताते हैं कि 2020 तक तकरीबन पचास हजार करोड़ का मेडिकल टूरिज्म हुआ है। नई पॉलिसी और योजनाओं के तहत 2026 तक इसको एक लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा जाना है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने बाकायदा दुनिया के अलग-अलग मुल्कों में अलग-अलग बीमारियों में खर्च होने वाली कीमत और इलाज का पूरा आंकड़ा भी तैयार किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के तैयार किए गए ड्राफ्ट के मुताबिक भारत में दुनिया के अन्य मुल्कों की तुलना में 65 से 95 फ़ीसदी सस्ता इलाज मिलता है। अमेरिका की तुलना में भारत में हार्ट वाल्व रिप्लेसमेंट 97 फ़ीसदी सस्ता है। जबकि बाईपास सर्जरी 96 फीसदी सस्ती है। इसके अलावा हिप रिप्लेसमेंट 96 फ़ीसदी सस्ता है। घुटनों के बदलने की कीमत में भी 88 फ़ीसदी कम लागत आती है। स्पाइन के इलाज में भारत और अमेरिका की तुलना में 94 फ़ीसदी सस्ता इलाज यहां मिलता है। हील इंडिया कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य मंत्रालय में दुनिया के अलग-अलग मुल्कों में मिलने वाले इलाज की तुलना भारत से की है। जिसमें सबसे सस्ता इलाज भारत में ही मिल रहा है।
दुनिया भर से आने वाले मरीजों को मिलने वाले इलाज के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में सिंगल विंडो कांसेप्ट की अवधारणा तैयार की है। धर्मशाला में आयोजित कॉन्फ्रेंस में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने इस पूरे प्रोजेक्ट को पेश करते हुए बताया कि सिंगल विंडो कांसेप्ट से मरीजों का भारत में इलाज कराना न सिर्फ आसान होगा, बल्कि कम समय में बेहतर इलाज भी मिलेगा। अपने देश में शुरू होने वाले मेडिकल ट्रैवल वैल्यू प्लान (एमवीटी) को और सुगम बनाने के लिए दुनिया के बेस्ट एमवीटी को भी समझा गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि जापान में मेडिकल टूरिज्म के लिहाज से उन देशों के डॉक्टरों को भी इसमें शामिल किया जाता है जिन देशों के मरीज यहां पर इलाज कराने आते हैं। ऐसा मरीजों की बोलचाल और भाषा को बेहतर तरीके से समझने के लिए किया जा रहा है। टर्की ने आने वाले मरीजों के लिए 20 फ़ीसदी एयरलाइन में डिस्काउंट की पेशकश की है। जबकि यूएई ने एयरपोर्ट के बगल में ही मेडिसिटी जैसे बड़े सेटअप तैयार किए हैं।