बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर के उस दावे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार अभी भी भाजपा के संपर्क में हैं। नीतीश ने कहा कि प्रशांत किशोर बेकार की बातें करते रहते हैं। प्रशांत किशोर ने गुरुवार को दावा किया कि नीतीश कुमार भाजपा के संपर्क में हैं और अगर हालात बनें तो वह एक बार भाजपा के साथ गठजोड़ कर सकते हैं। इसके जवाब में नीतीश ने कहा, मैं इस पर क्या कहूं। वो बेकार बात करते रहते हैं। वो इस तरह के बयान सिर्फ अपनी पब्लिसिटी के लिए देते हैं। हर कोई जानता है कि वो किस पार्टी के लिए काम कर रहे हैं।
किशोर का दावा, नीतीश अभी भी भाजपा के संपर्क में
किशोर ने बुधवार को यह भी कहा था कि नीतीश कुमार ने जद (यू) सांसद और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के माध्यम से भाजपा के साथ संवाद का रास्ता खुला रखा है। उन्होंने कहा कि भाजपा से नाता तोड़ने के बाद नीतीश कुमार को हरिवंश को पद छोड़ने के लिए कहना चाहिए था। अगर वह इस पद पर बने रहते तो उन्हें भविष्य में जद (यू) से निष्कासित किया जा सकता था। किशोर ने बुधवार को पश्चिम चंपारण जिले में एक जनसभा में ये बता कही थी जहां वह राज्यव्यापी 'पदयात्रा' के हिस्से के रूप में तीन सप्ताह से हैं। वहीं, मुख्यमंत्री ने कहा, उन्हें (किशोर) जो कुछ कहना है कहने दें। हमारा उससे कोई लेना-देना नहीं है। पहले वो मेरे साथ काम करते थे। ये सच है कि कुछ ऐसे लोग हैं जिन्हें मैंने प्रमोट किया था, उन्होंने मुझे धोखा दिया।
अपने आपको हाई कोर्ट का जज बताकर बिहार के डीजीपी को फोन कॉल कर शराब व्यापारियों के साथ संबंध रखने के आरोपी आईपीएस अधिकारी के प्रति नरमी बरतने को कहने वाले शख्स के मामले में नीतीश ने कहा कि इस मामले में सभी आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। निलंबित आईपीएस अधिकारी अभी फरार है। डीजीपी ने समय पर मामले का पता लगा लिया। राज्य पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने गुरुवार को जालसाज अभिषेक अग्रवाल को जेल भेज दिया। उसे धोखाधड़ी, प्रतिरूपण, सरकारी काम में बाधा डालने और साइबर अपराध के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
नीशीश बोले, निकाय चुनाव में ओबीसी के लिए सीटें आरक्षित
पटना हाई कोर्ट के नवीनतम फैसले के बारे में पूछे जाने पर कि बिहार में निकाय चुनाव हो सकते हैं, जिसमें सीटें अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित हैं, सीएम ने कहा कि बिहार देश का पहला राज्य है जहां सरकार ने अत्यंत पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की अनुमति दी है। हम पटना हाई कोर्ट के इस फैसले का स्वागत करते हैं और प्रक्रिया बहुत जल्द शुरू हो जाएगी। बुधवार को हाई कोर्ट ने 4 अक्टूबर को राज्य के शहरी स्थानीय निकायों में अत्यंत पिछड़े वर्गों के लिए कोटा को अवैध घोषित किया था। अदालत ने राज्य सरकार की उस दलील पर सहमति व्यक्त की कि आरक्षण के साथ नए चुनाव की अनुमति दी गई है। इसी उद्देश्य के लिए एक आयोग भी गठित किया गया था।