कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इसके बाद जनता दल (सेक्युलर) के औपचारिक रूप से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने का एलान किया गया। बैठक के दौरान बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गोवा के सीएम प्रमोद सावंत भी मौजूद रहे। लोकसभा चुनाव से कुछ ही माह पर पहले जेडीएस के एनडीए खेमे में आने को कर्नाटक के सियासी समीकरणों के लिहाज से भाजपा के लिए काफी अहम माना जा रहा है। दोनों दल लोकसभा चुनाव साथ मिलकर लड़ेंगे। माना जा रहा है कि राज्य में भाजपा 25 और जेडीएस 3 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
कुमारस्वामी से मुलाकात के बाद के शाह की तरफ से एक्स पर एक पोस्ट में दोनों दलों के बीच गठबंधन की जारी दी गई। इसमें शाह ने यह भी कहा कि उनका सहयोग कर्नाटक को विकास के पथ पर ले जाएगा और एक मजबूत एनडीए और एक मजबूत भारत का मार्ग प्रशस्त करेगा। दोनों नेताओं की इस मुलाकात के दौरान भाजपा अध्यक्ष नड्डा और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी मौजूद थे।
गौरतलब है कि दोनों दलों को साथ लाने में इसी साल हुए विधानसभा चुनाव ने अहम भूमिका निभाई। इस चुनाव में जहां भाजपा को कांग्रेस के हाथों सत्ता गंवानी पड़ी, वहीं जेडीएस का प्रदर्शन भी बेहद निराशाजनक रहा। नतीजे के बाद से ही दोनों दलों के नेता गठबंधन के लिए लगातार एक दूसरे के संपर्क में थे। भाजपा सूत्रों ने बताया कि गठबंधन पर पहले ही सहमति बन चुकी थी, मुख्य सवाल सीट बंटवारे का था।
भाजपा को पुराना प्रदर्शन दोहराने की उम्मीद
भाजपा को जेडीएस से गठबंधन के बाद राज्य में पुराना प्रदर्शन दोहराने की उम्मीद है। बीते चुनाव में भाजपा को राज्य की 28 में से 25, सहयोगी को एक सीट मिली थी। बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के वोटों का अंतर पांच फीसदी रहा है, जबकि जेडीएस को 13.29 फीसदी वोट मिले थे। जेडीएस का 15 फीसदी वोक्कालिगा समुदाय में मजबूत पकड़ है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि लिंगायत और वोक्कालिगा को साधने के कारण पार्टी का बेस वोट ही करीब 32 फीसदी हो जाएगा।