बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने कहा कि एक व्यक्ति का यौन कृत्य करना सामूहिक दुष्कर्म के अपराध में शेष आरोपियों को फंसाने के लिए पर्याप्त है, बशर्ते यह दर्शाने के लिए सामग्री हो कि उन दोनों का इरादा समान था। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने जून 2015 में पूर्वी महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र के चंद्रपुर में एक महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसके पुरुष मित्र पर हमला करने के मामले में चार लोगों की दोषसिद्धि को बरकरार रखा। दो दोषियों ने अपनी अपील में दावा किया कि उन्हें सामूहिक दुष्कर्म के अपराध के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि वे पीड़िता के साथ किसी भी तरह के यौन उत्पीड़न में शामिल नहीं थे और कथित अपराध से पहले उनकी कोई साझा मंशा नहीं थी।
जस्टिस जीए सनप की एकल पीठ ने इस तर्क को स्वीकार करने से इन्कार कर दिया। पीठ ने कहा, दोनों ने उस समय पीड़िता के पुरुष मित्र को दबोच लिया था। वे (दो दोषी) कानून के शिकंजे से बच सकते थे, बशर्ते उन्होंने आकाश को दबोचा न होता। मेरे विचार में, यह दोनों आरोपियों के ज्ञान और इरादे को दर्शाने के लिए पर्याप्त है। पीठ ने कहा, अगर दोनों आरोपियों ने पुरुष मित्र को नहीं रोका होता तो वह शोर मचा सकता था और अन्य दो लोगों को पीड़िता पर घिनौना कृत्य करने से रोक सकता था।