Assam: गुवाहाटी हाई कोर्ट ने असम सरकार से दो 'घोषित विदेशी' भाइयों की स्थिति पर जवाब मांगा है, जिन्हें 25 मई को हिरासत में लिया गया था। याचिका में आशंका जताई गई है कि उन्हें गैरकानूनी रूप से बांग्लादेश भेजा जा सकता है।
गुवाहाटी (गौहाटी) हाई कोर्ट ने असम सरकार को नोटिस जारी करते हुए आदेश दिया है कि वह उन दो भाइयों अबू बक्कर सिद्दीक और अकबर अली की वर्तमान स्थिति की जानकारी दे, जिन्हें एक न्यायाधिकरण ने 'घोषित विदेशी' करार दिया था और जो 25 मई को कामरूप जिले के नगरबेरा थाने में हिरासत में लिए गए थे। यह आदेश जस्टिस कल्याण राय सुराणा और जस्टिस मालश्री नंदी की बेंच ने गुरुवार को दिया। अगली सुनवाई की तारीख 4 जून तय की गई है।
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दोनों भाइयों के भतीजे तोराप अली की ओर से याचिका दायर की गई है। इसमें दावा किया गया है कि परिवार को डर है कि दोनों को गैरकानूनी तरीके से बांग्लादेश भेजा जा सकता है। याचिकाकर्ता का कहना है कि 25 मई के बाद से पुलिस ने उनके ठिकाने की कोई जानकारी नहीं दी। राज्य सरकार के वकील जे. पायेंग ने कोर्ट में बताया कि सिद्दीक और अली को असम सीमा पुलिस ने हिरासत में लिया है।
2017 में दोनों भाइयों को विदेशी घोषित कर गोलपाड़ा के हिरासत केंद्र (डिटेंशन सेंटर) में भेजा गया था, क्योंकि वे यह साबित नहीं कर पाए थे कि वे या उनके पूर्वज 24 मार्च 1971 से पहले भारत में आए थे, जो असम समझौते के अनुसार निर्धारित अंतिम तारीख है। 2020 में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद उन्हें जमानत पर रिहा किया गया, जिसमें कहा गया था कि दो साल से अधिक समय से हिरासत में रह रहे लोगों को जमानत दी जा सकती है।
याचिका में कहा गया है कि दोनों को उपलब्ध सभी कानूनी उपायों का लाभ लेने का मौका नहीं दिया गया और यदि उन्हें बिना किसी नतीजे के बांग्लादेश भेजा गया, तो यह संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। विदेशी न्यायाधिकरण असम में नागरिकता से जुड़े मामलों की जांच के लिए बने अर्ध-न्यायिक निकाय हैं। इनका उद्देश्य यह तय करना होता है कि कोई व्यक्ति विदेशी है या नहीं। पूरे असम में ऐसे 100 न्यायाधिकरण काम कर रहे हैं, जो खासतौर से राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से जुड़े मामलों पर फोकस करते हैं।