सार्वजनिक शौचालयों के रखरखाव पर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल न करने पर कर्नाटक हाईकोर्ट खासा नाराज हो गया है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार पर 5 लाख रूपये का जुर्माना लगा दिया। मुख्य न्यायाधीश प्रसन्ना बी वराले और न्यायमूर्ति कृष्ण एस दीक्षित की खण्डपीठ ने सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि शहरी विकास विभाग के सचिव व्यक्तिगत रुप से अदालत में मौजूद रहेंगे। कोर्ट ने उन्हें 2 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं।
शहर के नगर निगम (बीबीएमपी) ने एनजीओ लेट्ज़किट फाउंडेशन द्वारा दायर जनहित याचिका की पिछली सुनवाई में एक रिपोर्ट दायर की थी। बीबीएमपी को तीन हफ्तों के भीतर शहर में सार्वजनिक और सामुदायिक शौचालयों की स्थिति पर एक व्यापक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।
याचिकाकर्ताओं के वकील पुट्टीज रमेश ने कहा कि सरकार का नागरिकों के प्रति उपेक्षापूर्ण रवैया दिख रहा है। रिपोर्ट दाखिल करने में अधिकारियों की विफलता को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने कर्नाटक सरकार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया। बीबीएमपी ने 6 अगस्त को एक रिपोर्ट दायर की थी जिसे अदालत ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया क्योंकि यह अधूरी और विवरण की कमी थी।
सार्वजनिक शौचालयों पर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल न करने पर सरकार पर 5 लाख रुपये का जुर्माना, HC नाराजो