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Maharashtra: ड्यूटी पर मरने वाले सफाई कर्मियों के परिवारों को मिलेगा मुआवजा, हाईकोर्ट ने नगर निकाय को दिए आदेश

Fri, 21 Jul 2023 06:38 PM IST
Jeet Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

बॉम्बे हाईकोर्ट ने ड्यूटी पर जान गंवाने वाले सफाई कर्मियों के परिवारों के हित में बड़ा फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के ठाणे शहर में नागरिक निकाय को जल्द से जल्द मुआवजा जारी करने का निर्देश दिया है।
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बॉम्बे हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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बॉम्बे हाईकोर्ट ने ड्यूटी पर जान गंवाने वाले सफाई कर्मियों के परिवारों के हित में बड़ा फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र के ठाणे शहर में नागरिक निकाय को जल्द से जल्द मुआवजा जारी करने का निर्देश दिया है। आदेश में कहा गया है कि नगर निकाय को हर मामले में उत्तराधिकार या उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की जांच करने पर जोर देने की आवश्यकता नहीं है।

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न्यायमूर्ति धीरज सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति संदीप वी मारने की पीठ ने मंगलवार को श्रमिक जाटा संघ द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश पारित किया। संगठन के पदाधिकारी जगदीश खैरालिया ने एक विज्ञप्ति में कहा कि ड्यूटी के दौरान मरने वाले दस सफाई कर्मचारियों के परिवारों को अदालत के इस आदेश से लाभ होगा। 

बॉम्बे हाईकोर्ट की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि सीवर और निजी भवनों या कोऑपरेटिव सोसाइटी के सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मरने वाले सफाई कर्मियों के परिवारों को मुआवजे की राशि मिलने में हो रही देरी के मुद्दे को इस याचिका में उठाया गया है। साथ ही कहा कि ठाणे महानगरपालिका ने प्रभावित परिवारों को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने का प्रस्ताव स्वीकृत किया है, लेकिन वह रकम की अदायगी करने से पहले उत्तराधिकार या परिवार का सदस्य होने का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर जोर दे रहा है।
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याचिका दायर करने वालों ने आरोप लगाया है कि उत्तराधिकार प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की मांग के कारण मुआवजे की राशि के भुगतान में देरी हो रही है और उनका खर्च भी बढ़ रहा है। अदालत ने निर्देश दिया कि वह हर मामले में उत्तराधिकार या उत्तराधिकार प्रमाणपत्र पर जोर न दे और दावों की प्रारंभिक जांच करने और राशि जारी करने को कहा। अदालत ने मामले पर अगली सुनवाई के लिए 24 अगस्त की तारीख तय की है।

कंपनी को मोबाइल टावर लगाने से रोकने के ग्रामपंचायत के निर्देश को किया रद्द 
बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक ग्रामपंचायत द्वारा पारित उस प्रस्ताव को रद्द कर दिया, जिसमें ग्रामपंचायत ने पुणे की एक कंपनी को अपने मोबाइल टावर पर काम बंद करने का निर्देश दिया गया था। ग्रामपंचायत ने शिकायत दर्ज की थी मोबाइल टावरों से निकलने वाला विकिरण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है और कैंसरकारी हो सकता है।

वहीं न्यायमूर्ति एसबी शुक्रे और न्यायमूर्ति राजेश पाटिल की खंडपीठ ने गुरुवार को अपने आदेश में पुणे स्थित इंडस टावर्स को सांगली जिले के खानापुर तालुका के चिखलहोल में एक मोबाइल टावर स्थापित करने की अनुमति दी। साथ ही कहा कि वैज्ञानिक तथ्यों के अभाव में टावरों पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता है।
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फर्जी खबरों के खिलाफ फैक्ट चेक यूनिट को चार सितंबर तक नहीं करेंगे अधिसूचित
केंद्र ने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया कि वह सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ फर्जी सामग्री को चिह्नित करने के लिए ‘फैक्ट चेक यूनिट’ (एफसीयू) को चार सितंबर तक अधिसूचित नहीं करेगी। हाल ही में केंद्र ने संशोधित सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियमों के तहत एफसीयू स्थापित करने की घोषणा की थी। जस्टिस गौतम पटेल और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र के नियमों को सही ठहराने के लिए अदालत की ओर से निर्धारित पहले की तारीखों को स्थगित करने की मांग की। पीठ संशोधित आईटी नियमों को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा, एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और एसोसिएशन ऑफ इंडियन मैगजीन्स ने नियमों के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर असांविधानिक बताया। याचिकाओं पर अब 31 अगस्त और एक सितंबर को सुनवाई निर्धारित की।
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