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Mizoram: 'मैतेई-कुकी लोगों को साथ बैठकर सुलझाना चाहिए मुद्दा', राजनाथ सिंह ने चुनावी रैली के दौरान कही यह बात

Wed, 01 Nov 2023 04:22 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टिपा

सार

मिजोरम में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, मैतेई, कुकी समुदायों को आपस में बैठकर मुद्दा सुलझाना चाहिए। उन्होंने कहा, जब मणिपुर में स्थिति बिगड़ रही थी, तब कांग्रेस ने इस पर राजनीति करने की पूरी कोशिश की।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : वीडियो ग्रैब
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विस्तार
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मणिपुर की मैतेई और कुकी समुदायों को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मिजोरम के टिपा में खुलकर बोला है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, पिछले नौ वर्षों में पूर्वोत्तर शांत रहा है। हालांकि हमने मणिपुर में हिंसा देखी है, जो बेहद दर्दनाक है। साथ ही उन्होंने कहा, हिंसा किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। दोनों समुदायों को एक साथ बैठकर मुद्दों को सुलझाना चाहिए। इसमें दिल से दिल की बातचीत जरूरी है। 
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पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए, मणिपुर में दोनों समुदायों को स्थिति में सुधार के लिए एक-दूसरे से बात करनी चाहिए। जब मणिपुर में स्थिति बिगड़ रही थी, तब कांग्रेस ने इस पर राजनीति करने की पूरी कोशिश की। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर भी जमकर हमला बोला, उन्होंने कहा, जब मणिपुर में स्थिति बिगड़ रही थी, तब कांग्रेस ने इस पर राजनीति करने की पूरी कोशिश की। मिजोरम और पूर्वोत्तर समेत पूरे देश को कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति से दूर रखने की जरूरत है।

उन्होंने चुनावी रैली में कहा, अगर राज्य में भाजपा सत्ता में आती है तो मिजोरम को नशा मुक्त बनाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। रक्षा मंत्री ने कहा, नरेंद्र मोदी सरकार का मानना है कि जब तक पूर्वोत्तर वास्तव में विकसित नहीं होगा तब तक भारत का सपना पूरा नहीं होगा।
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बता दें मणिपुर में बीते महिनों में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष देखा गया। 3 मई को राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 180 से अधिक लोगों की जान चली गई है। मैतेई समुदाय द्वारा अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में आदिवासी एकजुटता मार्च आयोजित किया गया था। मणिपुर की आबादी में मैतेई लोगों की संख्या लगभग 53 प्रतिशत है और वे ज्यादातर इम्फाल घाटी में रहते हैं, जबकि आदिवासी, जिनमें नागा और कुकी शामिल हैं, 40 प्रतिशत हैं और ज्यादातर पहाड़ी जिलों में रहते हैं।
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