हाथरस में दलित बच्ची के साथ हुए कथित सामूहिक दुष्कर्म से एक बार फिर देश में कड़े कानून को लेकर आवाजें उठने लगी हैं। साल 2012 में निर्भया के साथ हुए दुष्कर्म के बाद से हर साल कोई ना कोई हैवानियत भरा मामला देखने को मिल जाता है। क्राइन इन इंडिया की 2019 की रिपोर्ट के मुताबिक देश में महिलाओँ के प्रति अपराध और बढ़े हैं।
रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि पिछले साल की तुलना में 2019 में महिलाओं के प्रति अपराध 7.3 फीसदी तक बढ़े हैं। 2019 में रोजाना औसतन दुष्कर्म के 88 नए मामले दर्ज किए गए हैं और पूरे साल में 32,033 नए मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 11 फीसदी मामले दलित महिलाओं और बच्चियों से जुड़े हुए हैं।
इसके अलावा नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, 2012 से लेकर 2019 तक देश में दुष्कर्म के लगभग 2.66 लाख मामले दर्ज किए गए हैं। पिछले साल सबसे ज्यादा मामले राजस्थान में दर्ज किए गए, जिनकी संख्या 6,000 थी और उसके बाद उत्तर प्रदेश में 3,065 मामले दर्ज किए गए।
यही नहीं रिपोर्ट में यह भी जानकारी दी गई है कि कितने मामलों में कितने लोगों को सजा मिली है और ये आंकड़ें चौंकाने वाले हैं। दुष्कर्म के मामलों में सजा की दर अभी भी 27 फीसदी ही है। फास्ट ट्रैक कोर्ट होने के बाद भी इतने कम मामलों की सुनवाई हुई है।
लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि 31 मार्च 2019 तक देश में 581 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए गए। इसके बाद भी पिछले दस सालों में दुष्कर्म के मामले 31 फीसदी तक बढ़े हैं। आइए एक बार नजर डालते हैं कि 2012 से लेकर 2019 तक दुष्कर्म के मामलों में कितनी बढ़ोतरी हुई..
| साल |
मामले |
| 2012 |
24,923 |
| 2013 |
33,707 |
| 2014 |
36,735 |
| 2015 |
34,651 |
| 2016 |
38.947 |
| 2017 |
32,559 |
| 2018 |
33,356 |
| 2019 |
33,033 |