ऐसा क्यों करती है पुलिस
इंडियन पब्लिक सर्विस एम्प्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीपी मिश्रा ने अमर उजाला से कहा कि पुलिस कभी किसी व्यक्ति का अंतिम संस्कार गलत तरीके से नहीं करती है। इसके लिए हमेशा उसके ऊपर राजनीतिक दबाव होता है। राजनीतिक दबाव के कारण कुछ नए अधिकारी सत्ता से अपनी करीबी दिखाने के लिए नियमों की अवहेलना करते हैं, जिसके कारण कई बार उन्हें आलोचना का शिकार होना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि आईएएस और आईपीएस जैसे सरकारी अफसरों की पहली ड्यूटी देश और नागरिकों के लिए होती है। उन्हें हमेशा कानून के मुताबिक काम करना चाहिए। किसी संवेदनशील स्थिति में परिवार और समाज के लोगों को साथ लेकर किसी समस्या का हल खोजने से इस तरह की स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता है जैसा कि पुलिस को हाथरस में झेलना पड़ रहा है।
क्या कहता है कानून
सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि आनंदपाल सिंह का शव लगभग 20 दिनों तक रखा रह गया था। परिजन उसके शव का अंतिम संस्कार करने को तैयार नहीं थे। इस मामले में सुनवाई करते हुए मानवाधिकार आयोग ने कहा था कि मृतक के कुछ अधिकार होते हैं। उसका सम्मान अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए। व्यक्ति का परिवार या पुलिस कोई भी उसके इस अधिकार का हनन नहीं कर सकता।
हाथरस के मामले में पुुलिस ने तकनीकी तौर पर कोई गलती नहीं की है, लेकिन इसके बाद भी परिवार वालों को साथ न लेने के आरोप संगीन हैं। पुलिस को ऐसे किसी भी मामले में संवेदनशीलता बरतनी चाहिए और परिवार-समाज को साथ लेकर समस्या का समाधान करना चाहिए।