भाजपा और एनडीए के नेताओं को नहीं रास आया योगी फार्मूला
जद(यू) महासचिव केसी त्यागी पहले ही योगी सरकार के कदम की आलोचना कर चुके हैं। भाजपा की नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपनी असहमति जता दी है। उमा भारती का कहना है कि यूपी सरकार को मीडिया और नेताओं को हाथरस पीड़िता के गांव जाने देना चाहिए था। अब आइए भाजपा मुख्यालय चलते हैं। पार्टी के कई नेता ऑफ द रिकार्ड कह रहे हैं कि यूपी सरकार मामले को ढंग से मैनेज नहीं कर पाई।
पार्टी के एक पूर्व सांसद का कहना है कि योगी सरकार लगातार कानून-व्यवस्था के मामले में अपना रिकॉर्ड खराब कर रही है। बनारस के एक विधायक ने भी कहा कि सरकार को लखनऊ से कुछ आईएएस अफसर चला रहे हैं। जब अफसर सरकार चलाते हैं, तो वहां अफसरी प्रपंच के अलावा कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए। मेरठ के संघ से जुड़े एक बड़े नेता का कहना है कि बिना वजह थोड़ी सी चूक के चलते लोगों को राजनीति करने का अवसर मिल गया। समझा जा रहा है कि इस मामले को लेकर केंद्र के भाजपा के कुछ बड़े नेताओं ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ से न केवल बात की बल्कि अपने सुझाव भी दिए हैं।
प्रियंका-राहुल, चंद्रशेखर रावण बन रहे हैं गेम चेंजर
प्रियंका गांधी की सूझ-बूझ और राहुल गांधी के जोश ने हाथरस मामले को नया प्लॉट दिया है। लखनऊ के सचिव स्तर के एक अधिकारी का कहना है कि हाथरस, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, समेत तमाम क्षेत्रों में आजाद समाद पार्टी के नेता चंद्रशेखर आजाद रावण की फॉलोइंग काफी बढ़ी है। रावण के हाथरस मामले में उतरकर न्याय की मांग से भी प्रदेश सरकार के अफसर परेशान हो गए और उन्हें नजरबंद कर दिया गया। इससे जितना चंद्रशेखर को राजनीतिक बढ़त मिल रही है, उतना ही बहुजन समाज पार्टी की मायावती को नुकसान हो रहा है। बताते हैं इसी स्थिति से बचने के लिए यूपी सरकार ने आनन-फानन में पीड़िता के परिवार को 25 लाख रुपये मुआवजा, घर और परिवार के एक आदमी को नौकरी देने का वादा कर लिया। लेकिन अगले दिन तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन के साथ राहुल गांधी जैसी बदसलूकी तथा सपा कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज, हाथरस की नाकेबंदी, मीडिया पर सेंसर ने स्थिति को और उलझा दिया।
उपचुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव में भी पहुंच रही हाथरस की आवाज
मध्यप्रदेश की 28 सीटों पर उपचुनाव सहित कुल 12 राज्यों की 56 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बिहार विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया भी चल रही है। राजनीति के पंडितों का मानना है कि इसका असर उपचुनाव और विधानसभा चुनाव पर पड़ना तय है। मध्यप्रदेश के एक स्थानीय अखबार के संपादक का कहना है कि ग्वालियर, भिंड, मुरैना, चंबल संभाग में भी लोग रहते हैं। यूपी में भाजपा सरकार की निष्क्रियता एमपी के इन जिलों में लोगों को प्रभावित कर सकती है। वहीं 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में दादरी के बिलाहदा गांव (यूपी) की घटना (अखलाक प्रकरण) ने काफी प्रभावित किया था। समझा जा रहा है कि राहुल और प्रियंका के हाथरस से लौटकर आने के बाद अब पीड़ित परिवार से मिलने के लिए जाने वाले नेताओं का तांता लगा रहेगा। यूपी सरकार इसे सोचकर भी परेशान है।