हरियाणा के चार जिलों में ब्लॉक समिति की 559 और जिला परिषद के 78 वार्डों की सीटों पर आज आखिरी चरण का मतदान हो रहा है। इसके पहले दो चरण में चुनाव हो चुके हैं। इस चुनाव में प्रदेश की कुल 22 परिषदों में 411 सदस्यों और 143 ब्लाक समितियों में 3,081 सदस्यों, 6,220 पंचायतों में 61 हजार 993 पंचों और 6,220 सरपंचों का चुनाव होगा।
ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि इस पंचायत चुनाव के क्या मायने हैं? इसे हरियाणा की सत्ता का सेमीफाइनल क्यों कहा जा रहा है? आइए समझते हैं...
पहले पंचायत चुनाव के बारे में जान लीजिए
हरियाणा में तीन चरणों में पंचायत चुनाव हो रहे हैं। पहले और दूसरे चरण की वोटिंग प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आज तीसरे चरण की वोटिंग चल रही है। पहले चरण का मतदान 30 अक्तूबर को हुआ। तब नौ जिलों में मतदान हुआ था। दूसरे चरण का मतदान नौ नवंबर को हुआ। उस दिन भी नौ जिलों में मतदान हुआ था। आज तीसरे चरण में चार जिलों में मतदान की प्रक्रिया जारी है।
इनमें फरीदाबाद, पलवल, हिसार और फतेहाबाद शामिल हैं। फरीदाबाद में जिला परिषद की 10, फतेहाबाद में 18, हिसार में 30 और पलवल में 20 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। इन सीटों पर 581 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं, जिनमें 250 महिलाएं और 331 पुरुष शामिल हैं। वहीं ब्लॉक समिति की सीटों पर 2,208 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें 963 महिलाएं और 1,245 पुरुष हैं। आज हो रहे चुनाव के साथ मतदान प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी। सभी जिलों का परिणाम 27 नवंबर को घोषित होगा।
जीत-हार के क्या होंगे मायने?
इसे समझने के लिए हमने राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अजय कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कहा, '2020 में केंद्र सरकार के कृषि कानून के खिलाफ हुए आंदोलन का असर जिन राज्यों में सबसे ज्यादा दिखा था उनमें हरियाणा भी शामिल था। आंदोलन के बाद राज्य में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर चुनाव हो रहे हैं। किसान आंदोलन का ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों में था। ऐसे में इस पंचायत चुनाव से ये भी साफ होगा कि क्या राज्य में इसका असर अभी भी है। हालांकि, उत्तर प्रदेश चुनाव में इसका खास असर नहीं दिखा था। भाजपा को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जहां इस आंदोलन का काफी असर था, वहां भी अच्छी सफलता मिली थी।'
क्यों कहा जा रहा 2024 से पहले का सेमीफाइनल?
डॉ. अजय कुमार सिंह कहते हैं, ‘पंचायत चुनाव नतीजों का फायदा पार्टियों को 2024 के लोकसभा और उसके बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में मिलेगा। ग्राम प्रधानों और सरपंचों के जरिए जीतने वाली पार्टी मजबूती के साथ अपनी बात ग्रामीणों तक पहुंचा पाएगी। ग्रामीण वोटर्स को एकजुट करने का ये अच्छा मौका है।