दूसरा, पंजाब में आम आदमी पार्टी की प्रचंड जीत के बाद उन्हें लगता है कि एक बार दोबारा से 'सीएम' की दौड़ में शामिल होना चाहिए। उनके मंच से आप के राज्यसभा सांसद सुशील गुप्ता ने कहा, यदि वे 'आप' में आते हैं तो उनके सारे सपने पूरे हो जाएंगे। उन्होंने चौधरी बीरेंद्र सिंह को आप में शामिल होने का निमंत्रण दे दिया। इस पर बीरेंद्र सिंह ने कहा कि 'स्वागत की धार काढनी है मन्नै, स्वागत तैं आगे की कोई बात करो'। यहां पर उनकी बात का मतलब समझा जा सकता है कि वे राजनीतिक करियर में क्या चाह रहे हैं। प्रदेश में भाजपा से जुड़े एक नेता ने कहा, शुरू में अमित शाह को लगा था कि बीरेंद्र सिंह के पीछे बड़ा जाट वोट बैंक है। 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में इस बात की पोल खुल गई।
भाजपा को असलियत मालूम है, कौन कितने पानी में है?
रोहतक में भाजपा के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता कहते हैं, पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के बाद भी अगर चौ. बीरेंद्र सिंह को कोई मुगालता है तो वे खुद ही समझें। भाजपा, संगठन की बात करती है। चेहरे को तव्वजो नहीं मिलती। भाजपा एक परिवार की पार्टी नहीं है। आरएसएस जैसा बड़ा संगठन, पार्टी की गतिविधियों पर नजर रखता है। बीरेंद्र सिंह के पार्टी छोड़ने से किसी को कोई नुकसान नहीं होगा। वे अपने बेटे को मंत्री बनवाना चाहते हैं, इसलिए शक्ति प्रदर्शन कर पार्टी पर दबाव डाल रहे हैं। पार्टी तो पिछले दो लोकसभा चुनाव में उनका जनाधार देख कर चुकी है। अगर अब वे राजनीति को 'लव एंड वॉर' समझकर आत्मघाती कदम उठाना चाह रहे हैं तो उसके नुकसान के जिम्मेदार भी वही होंगे। उनके सांसद बेटे बृजेंद्र सिंह ने अपने पिता के आप में शामिल होने की संभावनाओं को ठीक नहीं बताया है। उनका कहना है, जींद में चौधरी बीरेंद्र सिंह के सार्वजनिक जीवन में 50 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में कार्यक्रम आयोजित किया गया था।