अशोक खेमका आज चर्चा में क्यों?
अशोक खेमका आज यानी 30 अप्रैल 2025 को 60 वर्ष के हो गए। आज नौकरशाह के तौर पर सेवा का उनका आखिरी दिन था।
रिटायरमेंट से पहले खेमका की आखिरी पोस्टिंग कहां?
अशोक खेमका की आखिरी पोस्टिंग दिसंबर 2024 में हुई थी, जब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार ने उन्हें हरियाणा परिवहन विभाग में अतिरिक्त मुख्य सचिव नियुक्त किया। अब इसी विभाग और पद से उनकी सेवानिवृत्ति हो रही है।
कैसे और क्यों सुर्खियों का हिस्सा बने अशोक खेमका?
1. पदोन्नति को लेकर मुख्य सचिव को लिखी चिट्ठी
अशोक खेमका के साथ जो एक सबसे बड़ा केस जुड़ा, वह था रॉबर्ट वाड्रा के जमीन लेन-देन से जुड़ा मामला। हालांकि, उनकी एक अलग पहचान इससे पहले 2011 में ही बन गई थी। तब वे सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण विभाग में निदेशक के पद पर थे। खेमका ने इस दौरान हरियाणा के मुख्य सचिव को कुछ चिट्ठियां लिखी थीं, जिनमें कहा गया था कि उन्हें मौजूदा सरकार (भपिंदर हुड्डा की सरकार) में बेइज्जत किया जा रहा है, क्योंकि उन्हें एक जूनियर पद दिया गया। खेमका ने कहा कि उनसे कम अनुभव वाले अफसरों को महानिदेशक, आयुक्त और प्रबंध निदेशकों के पद सौंपे गए हैं, जबकि उन्हें निदेशक पद पर ही रखा गया।
2. वृद्धावस्था पेंशन योजना की गड़बड़ियों को सामने लाए
3. हायरिंग में गड़बड़ियों-सार्वजनिक फंड्स के खर्चों को लेकर उठाए सवाल
अशोक खेमका को इसके बाद हरियाणा के इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HARTRON) में नियुक्त किया गया। हालांकि, यहां उन्होंने विभाग में कंसल्टेंट्स (परामर्शदाताओं) की हायरिंग उन्हें सार्वजनिक फंड्स से करोड़ों के भुगतान को लेकर सवाल उठाए। इसके बाद उन्हें इस विभाग से भी दो महीने में ही ट्रांसफर कर दिया गया।
4. जमीन अधिग्रहण से जुड़े विभाग में ट्रांसफर, वाड्रा-डीएलएफ डील पर उठाए सवाल
खेमका को इसके बाद जमीन अधिग्रहण अफसर और विशेष कलेक्टर के तौर पर नियुक्त किया गया। हालांकि, उन्होंने यहां भी सरकार से विवादित जमीन अधिग्रहणों पर सवाल जारी रखे। तब उन्होंने किसानों की जमीन छीने जाने का मुद्दा उठाते हुए नेताओं और नौकरशाही की मिलीभगत की भी बात की थी।
6. परिवहन आयुक्त रहते हुए अवैध रेत खनन पर उठाए सवाल, फिर ट्रांसफर
2014 में हरियाणा में भाजपा सरकार आई। इसी के साथ अशोक खेमका की मुख्यधारा में वापसी सुनिश्चित हुई। खेमका को नवंबर 2014 में परिवहन आयुक्त नियुक्त किया गया। हालांकि, यहां अवैध रेत खनन और अतिरिक्त बोझ उठाने वाले ट्रकों की जांच को जोर-शोर से बढ़ा दिया। पांच महीने बाद ही उनके अभियानों पर रोक लग गई और उन्हें फिर से आर्केयोलॉजी विभाग में भेज दिया गया।
संबंधित वीडियो