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हरियाणा में भाजपा ने खेला 'सोशल इंजीनियरिंग' का फॉर्मूला, जाटों को जमकर बांटे टिकट!

Tue, 01 Oct 2019 02:05 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला
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पंचकूला में सीएम मनोहर लाल खट्टर की रैली - फोटो : amar ujala
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हरियाणा के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने सोशल इंजीनियरिंग का जो फार्मूला तैयार किया था, वह सुपरहिट रहा। विधानसभा चुनाव में एक बार फिर मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर और उनकी टीम उसी फार्मूला पर आगे बढ़ रही है। खास बात यह है कि इस बार सोशल इंजीनियरिंग को लेकर जो नई रणनीति बनी है, वह चौंकाने वाली है। लोकसभा चुनाव या उससे पहले के विधानसभा चुनाव में भाजपा काफी हद तक गैर-जाट वोटों तक सीमित रही थी।

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इस बार के विधानसभा चुनावों में जिस तरह से जाट समुदाय के उम्मीदवारों को दिल खोलकर टिकट दिए गए हैं, उससे तमाम विपक्षी दल सकते में आ गए हैं। नई रणनीति से भाजपा यह उम्मीद कर रही है कि इस बार के चुनाव में उसे जाट और नॉन जाट, सभी का वोट मिल जाएगा। यही समीकरण भाजपा को 90 में से 75 सीट जीतने के लक्ष्य तक पहुंचा देगा।

नॉन-जाट वर्ग की पार्टी का टैग

बता दें कि 2014 या उससे पहले तक हरियाणा में भाजपा को एक अलग ही नजरिए से देखा जाता था। भाजपा तो शहरी क्षेत्रों के लोगों की पार्टी है, इसमें किसान कम और व्यवसाय से जुड़े लोगों की बहुलता है। इसके अलावा भाजपा पर नॉन-जाट वर्ग की पार्टी का टैग भी लग चुका था। प्रदेश की राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले रिसर्च स्कॉलर रविंद्र कुमार का कहना है कि यह बात सही है, अभी तक भाजपा को गैर-जाटों की पार्टी कहा जाता रहा है। प्रदेश में 2016 के आरक्षण आंदोलन के दौरान जो दंगे हुए, उसके बाद एक ऐसी तस्वीर उभर कर सामने आई, जिसने भाजपा को पूरी तरह से गैर जाटों की पार्टी बना दिया।

सोशल इंजीनियरिंग फार्मूले से मिली जीत

उस वक्त विपक्षी दलों के बड़े नेताओं की कमी यह रही कि वे खुद को जाट समुदाय के आसपास ही रखकर चलते रहे। चूंकि भाजपा को मालूम था कि गैर जाट वोट अगर उसे मिलते हैं, तो उसकी भारी जीत सुनिश्चित है। वह अंदरखाने सोशल इंजीनियरिंग के इसी फार्मूले पर आगे बढ़ती रही। नतीजा, लोकसभा चुनाव में प्रदेश की सभी दस सीटें भाजपा की झोली में आ गिरीं। मतलब, भाजपा ने जो रणनीति बनाई थी, वह पूरी तरह कामयाब रही।

कई जाट नेताओं को टिकट

भाजपा ने विधानसभा चुनाव के लिए अभी तक 78 उम्मीदवारों की घोषणा की है। इनमें कोई भी उम्मीदवार ऐसा नहीं है, जो सोशल इंजीनियरिंग की रणनीति से बाहर हो। पार्टी ने इस बार जाट समुदाय के 21 से अधिक नेताओं को विधानसभा का टिकट थमा दिया है। अभी दूसरी सूची आनी बाकी है। इंडियन नेशनल लोकदल के विभाजन के बाद जिन विधायकों ने भाजपा ज्वाइन की थी, उनके साथ भी पार्टी ने वफादारी निभाई है।

परमिंद्र सिंह ढुल, रामचंद्र कंबोज, रणबीर गंगवा, जाकिर हुसैन, नसीम अहमद और नगेंद्र भड़ाना को टिकट दे दिया गया है। शिरोमणि अकाली दल के विधायक बलकौर सिंह को कालांवाली विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया गया है। कांग्रेस के पूर्व विधायक विनोद भ्याना को हांसी और होडल से इनेलो के पूर्व विधायक जगदीश नायर को भी टिकट मिला है।

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प्रमुख जाट नेता, जिनका नाम विधानसभा उम्मीदवारों की पहली सूची में शामिल है, उनमें सुभाष बराला, कमलेश ढांडा, महिपाल ढांडा, तीरथ सिंह राणा, परमिंदर ढुल, प्रेमलता, पवन बेनीवाल, संतोष, आदित्य देवी लाल, आशा खेदर, कैप्टन अभिमन्यु, सुरेंद्र पूनिया, रणवीर गंगवा, जेपी दलाल, बबीता फौगाट, सतीश नांदल, प्रवीण डागर, ओमप्रकाश धनखड़ और विक्रम कादियान आदि शामिल हैं।

सभी वर्गों को दिल खोल कर टिकट

भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला का मानना है कि भाजपा प्रदेश में एकमात्र ऐसी पार्टी है, जो सभी वर्गों को साथ लेकर चलती है। विपक्षी दल सत्ता के लिए लोगों को आपस में लड़ाते हैं। प्रदेश की कई पार्टियां आज भी पुराने ढर्रे पर चलकर चुनाव जीतना चाहती हैं। यह चुनाव उन पार्टियों को उनकी गलती का अहसास करा देगा। भाजपा ने सभी वर्गों के लोगों को दिल खोलकर टिकट दिया है। कोई भी पार्टी कम से कम भाजपा पर यह आरोप नहीं लगा सकती कि हमने जाट या नॉन जॉट की राजनीति को ध्यान में रखकर टिकटों का वितरण किया है। यही वजह है कि चुनाव में भाजपा को 75 से ज्यादा सीटें मिलेंगी।

हम अपने टारगेट को पूरा कर रहे हैं। यह सही है कि हमने सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला तैयार किया है, लेकिन उसमें सभी वर्ग शामिल हैं। नए जमाने की नई सोशल इंजीनियरिंग निश्चित तौर पर भाजपा को फायदा पहुंचाएगी।

भाजपा पर भाईचारा खराब करने का आरोप

कांग्रेस पार्टी के नेता रणदीप सुरजेवाला कहते हैं कि भाजपा ने प्रदेश में लोगों का भाईचारा खराब किया है। आज युवाओं को नौकरी के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। लाखों लोग बेरोजगारी की लाइन में खड़े हैं। कोई अपना हक मांगता है तो उसे पुलिस की लाठियां मिलती हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा को सबक सिखाने के लिए जनता तैयार बैठी है।

स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव कहते हैं कि खट्टर सरकार ने किसी भी वर्ग के लिए कुछ नहीं किया। एक भी चुनावी वादा पूरा नहीं किया। यह सरकार शराब की खपत घटाने का वादा कर सत्ता में आई थी, लेकिन अब भाजपा सरकार ने शराब की खपत 22 करोड़ लीटर से बढ़ाकर 32.25 करोड़ लीटर तक पहुंचा दी है। यादव का आरोप है कि खट्टर सरकार ने अपनी गलत नीतियों के चलते प्रदेश के युवाओं का भविष्य अंधकार में धकेल दिया है।

 

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