जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा, हर्ष फायरिंग हमारे देश में एक दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन प्रचलित प्रथा है। वर्तमान मामला इस तरह की अनियंत्रित और अनुचित हर्ष फायरिंग के विनाशकारी परिणामों का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शादी समारोहों के जश्न में हर्ष फायरिंग की घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं और इनके अक्सर विनाशकारी परिणाम होते हैं। 2016 में एक शादी में हर्ष फायरिंग में एक अन्य की हत्या के आरोपी व्यक्ति की सजा रद्द करते हुए शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी की।
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जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने कहा, हर्ष फायरिंग हमारे देश में एक दुर्भाग्यपूर्ण लेकिन प्रचलित प्रथा है। वर्तमान मामला इस तरह की अनियंत्रित और अनुचित हर्ष फायरिंग के विनाशकारी परिणामों का प्रत्यक्ष उदाहरण है। पीठ ने ट्रायल कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट से शाहिद अली को दी गई आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने उन्हें आईपीसी की धारा 304 भाग 2 (गैर इरादतन हत्या) के तहत दोषी ठहराया। लेकिन चूंकि वह आठ साल पहले ही जेल में काट चुका है इसलिए उसे रिहा कर दिया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 17 मार्च, 2016 को उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद के जसराना पुलिस स्टेशन में गुलाब अली नाम के एक व्यक्ति ने शाहिद अली के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। शाहिद की ओर से की गई हर्ष फायरिंग में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी।