आपने कभी अंटार्कटिका देखा है? हां देखा तो जरूर होगा लेकिन किताबों में। किताबों में इस महाद्वीप की मौजूदगी सिर्फ आपको इसकी बर्फ की चादरों में सिमटी दुनिया के बारे में ही बताती है। वहां जाने का ख्वाब शायद बहुत कम लोगों के जहन में आता होगा लेकिन एक भारतीय जोड़ा अपने सपनों की उड़ान भरने अंटार्कटिका की ओर जा रहा है।
उत्तराखंड के अक्षत जैन और राजस्थान की सोना जैन 28 फरवरी को अंटार्कटिका के लिए रवाना होंगे। अक्षत और सोना खोजकर्ताओं के 80 सदस्यीय दल का हिस्सा होंगे, जिन्हें सर रॉबर्ट स्वान के नेतृत्व में अंटार्कटिका जाने के लिए दुनिया भर से चुना गया है। रॉबर्ट स्वान उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव जाने वाले पहले व्यक्ति हैं। इस अभियान का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और स्थिरता के बारे में जागरूकता बढ़ाने का है।
इस अभियान का उद्देश्य ऊर्जा / जलवायु चैंपियनों की आवाजाही बनाना है जो जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का मुकाबला करने के संदेश को बढ़ाएगा। अभियान के दौरान खोजकर्ताओं को अंटार्कटिका में रहने की ट्रेनिंग दी जाएगी साथ ही वे अंटार्कटिका पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का अध्ययन भी करेंगे।
सोना से इस यात्रा के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि हम इस दौरान एक ऐसे मुद्दे के बारे में जानकारी हासिल करेंगे जो मौजूदा समय में विश्व को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है। हम इस अभियान में जोॉ कुछ भी सीखेंगे उसे बेहतर भविष्य के लिए सबसे साझा जरूर करेंगे।
अक्षत से पूछने पर उन्होंने बताया कि वहां जाना हमारे लिए एक अनोखा अनुभव होगा। वहां की जलवायु अलग है, वहां का वन्यजीवन अलग है और इन पर ग्लोबल वार्मिंग का क्या असर पड़ रहा है इसके बारे में करीब से हम जान पाएंगे।
इस अभियान के बाद इस जोड़े ने चॉक टॉक्स एंड ब्लॉग के माध्यम से समुदाय में जागरुकता फैलाने का फैसला किया है। साथ ही बच्चों और महिलाओं को सशक्त बनाने की भी कोशिश करेंगे। आपको बता दें, अक्षत और सोना ने बिट्स, पिलानी से इंजीनियरिंग की है। इंजीनियरिंग के बाद अक्षत ने आईएसबी हैदराबाद से एमबीए किया और सोना ने एनटीयू, सिंगापोर से एमबीए किया। आज दोनो माइक्रोसॉफ्ट सिंगापोर में काम कर रहे हैं।