सफदरजंग हॉस्पिटल के कम्यूनिटी मेडिसिन के प्रमुख डॉ. जुगल किशोर ने अमर उजाला को बताया कि अभी जो हालात हैं उनमें एच3एन2 के मरीज तो अस्पतालों में दिखाने आ रहे हैं, जिन्हें बुखार, खांसी, सिर दर्द आदि की परेशानियां हैं। लेकिन अभी बहुत कम ऐसे मामले है जिन्हें आक्सीन की जरुरत पड़ी हो। हां एच1एन1 फ्लू वायरस के कुछ मरीज जरूर गंभीर देखे गए थे और बेहद कम मामलों में ऑक्सीजन की जरूरत भी पड़ी थी। कुछ ऐसे मरीज जो अस्थमा, सांस फूलना और निमोनिया से पीड़ित हैं या जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है ऐसे मरीजों को आक्सीजन की जरुरत पड़ सकती है।
यह भी पढ़ें: H3N2 Virus: दिल्ली में एच3एन2 के साथ बढ़े कोरोना के मामले, संक्रमण दर तीन फीसदी के पार, 10 से अधिक आए मामले
डॉ. जुगल किशोर का कहना है कि H3N2 वायरस का खतरा बच्चों और बुजुर्गों को अधिक है, क्योंकि यह इम्यूनिटी पर हमला करता है। जिन लोगों को अस्थमा, हृदय रोग, डायबिटीज, मोटापा और कमजोर इम्यूनिटी की शिकायत है, उन्हें भी खतरा अधिक है। गर्भवती महिलाओं को भी इस वायरस का ज्यादा खतरा है। कोविड के कारण दो साल तक बच्चे घर में ही रहे और वह स्कूल और भीड़-भाड़ वाली जगहों से दूर रहे। लेकिन अब स्कूल खुल गए हैं और बाजारों में भी भीड़ बढ़ गई है, इसलिए इस सामान्य वैरिएंट के कारण बच्चों में इस वायरस के बढ़ते मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है।
कोविड जैसे हैं H3N2 और H1N1 के लक्षण
भारत में अब तक केवल H3N2 और H1N1 संक्रमण का पता चला है। दोनों में कोविड जैसे लक्षण हैं। इनके लक्षणों में लगातार खांसी, बुखार, ठंड लगना, सांस फूलना और घरघराहट शामिल हैं। इसके अलावा मरीजों ने गले में खराश, शरीर में दर्द और दस्त की भी सूचना दी है। ये लक्षण लगभग एक सप्ताह तक बने रह सकते हैं।