पंजाब में विधानसभा चुनाव सिर पर हों और तभी श्री गुरु ग्रंथ साहिब की 'बेअदबी' की घटना हो जाए तो सियासी पारे का चढ़ना लाजिमी है। पंजाब में 'बेअदबी' को 'दो अर्थ' वाली साजिश बताया जा रहा है। जानकारों का ये भी कहना है कि कहीं '2022' के लिए '2015' वाली 'बहबल कलां' की घटना का दोहराव तो नहीं है। बेअदबी की उस घटना के बाद हुई पुलिस गोलीबारी में दो लोग मारे गए थे। करीब डेढ़ साल बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए। नतीजा, शिअद-भाजपा गठबंधन की सरकार दोबारा सत्ता में नहीं आ सकी। बेअदबी की ताजा घटनाओं पर सियासतदानों की 'खामोशी' बहुत कुछ कह रही है। अधिकांश नेता, बेअदबी की घटना पर बयानबाजी के लिए शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी 'एसजीपीसी' को फॉलो कर रहे हैं। अधिकांश नेताओं के बयान एक जैसे हैं। साजिश की आशंका के मद्देनजर, एसजीपीसी ने अपने सभी गुरुद्वारों में पुख्ता सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सेवादारों को तैनात कर दिया है। 'बेअदबी' जैसा कुछ न हो, इसलिए गांवों में स्थित गुरुद्वारों पर भी नजर रखी जा रही है।
पंजाब पुलिस एवं इंटेलिजेंस एजेंसियों के सूत्र बताते हैं कि अतीत में जब कभी ऐसी घटनाएं हुई हैं, सिखों का गुस्सा भड़क उठता है। राज्य में प्रदर्शन होने लगते हैं। कई बार सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है। अभी माहौल को काबू में रखने का भरसक प्रयास किया जा रहा है, लेकिन सियासतदानों की बयानबाजी पुलिस की मेहनत पर पानी फेर सकती है। प्रदेश में अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए जा रहे हैं। सभी बड़े एवं एतिहासिक गुरुद्वारों पर पुलिस की चौकसी बढ़ा दी गई है। केंद्र एवं राज्य की इंटेलिजेंस यूनिट, सीमा पार बैठे आईएसआई व उसके खालिस्तानी गुर्गों के प्लान पर नजर रख रही हैं।
फरीदकोट जिले के बहबल कलां में अक्तूबर 2015 में बेअदबी की घटना हुई थी। पवित्र श्री गुरु ग्रंथ के 110 फटे अंग (पृष्ठ) पड़े हुए थे। इसके बाद लोगों का गुस्सा भड़क उठा। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। दूसरी जगहों पर भी बेअदबी के मामले सामने आने लगे। पुलिस की गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई। राजनीतिक दलों के नेताओं की तीखी बयानबाजी ने जलती आग में घी डालने का काम किया। उसकी नतीजा ये हुआ कि 2017 के विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा गठबंधन की सरकार को सत्ता से बाहर होना पड़ा। अब वैसा ही डर कांग्रेस पार्टी को सता रहा है। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, बहुत संभलकर बोल रहे हैं। उन्होंने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया है। बताया जा रहा है कि इसमें चन्नी ने एसजीपीसी की सहमति ले ली है। उनकी पार्टी के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू तीखी बयानबाजी कर रहे हैं। सिद्धू ने कहा, बेअदबी करने वालों लोगों को फांसी पर लटका दिया जाए।
पहले अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की कोशिश और उसके बाद कपूरथला में बेअदबी का प्रयास, इस तरह की घटनाएं खुद ब खुद नहीं हो रही हैं। इसके पीछे बड़ी साजिश है। पंचकुला स्थित नाडा साहिब गुरुद्वारे के प्रबंधक मलकीत सिंह का कहना है, चुनाव के आसपास ऐसी घटनाएं होने लगती हैं। इसके पीछे सियासी साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सिखों को निशाना बनाने का प्रयास हो रहा है। पंजाब की सियासत को तगड़ा झटका देने वाले 2015 के 'बेअदबी' कांड की जांच रिपोर्ट आई है। एसआईटी ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट में कहा है, बेअदबी की साजिश सिरसा के डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में रची गई थी। पंजाब के हर गांव और शहर में गुरुद्वारे हैं। कई बड़े गांवों में तो दो तीन गुरुद्वारे भी हैं। एसजीपीसी के पास बड़े एवं ऐतिहासिक गुरुद्वारों को मिलाकर साढ़े चार सौ से ज्यादा गुरुद्वारे हैं। सभी गुरुद्वारों की सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। अतिरिक्त सेवादारों की तैनाती की गई है। बता दें कि नाडा साहिब सिखों का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थान है। 1688 में भांगानी की लड़ाई के बाद पावंटा साहिब से आनंदपुर साहिब की यात्रा करते हुए गुरु गोबिंद सिंह यहां रुके थे।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की तरफ से कहा गया कि इस घटना के पीछे कोई गहरी साजिश है। इसके बाद उप मुख्यमंत्री और गृह विभाग के प्रमुख सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया। अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल ने कहा, यह 'कौम' पर हमला है। पंजाब भाजपा के प्रधान अश्विनी शर्मा ने इस घटना की निंदा की है। उन्होंने कांग्रेस पर हमला भी बोला। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा, हमारे सर्वोच्च और पवित्र तीर्थ सचखंड श्री हरमंदर साहिब में बेअदबी सबसे जघन्य अपराध है। इसके पीछे गहरी साजिश है। पूर्व सीएम ने इस मामले में पंजाब सरकार की खुफिया एजेंसियों पर सवाल उठा दिया। पूर्व सीएम और पंजाब लोक कांग्रेस के संस्थापक कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बेअदबी की घटना की तीखी आलोचना की है। उन्होंने बादल की तरह पंजाब पुलिस या आईबी को कटघरे में नहीं खड़ा किया। उनकी और भाजपा नेताओं की बयानबाजी, मिलती हुई नजर आई। कांग्रेस पार्टी की तरफ से सिद्धू, तीखे बयान जारी कर रहे थे। शिरोमणि अकाली दल की बयानबाजी वैसी ही थी, जैसी 2015 के बेअदबी कांड में कांग्रेस पार्टी ने उनकी सरकार के खिलाफ की थी।