गुजरात के राजकोट के एक कोविड-19 अस्पताल में आग लगने से पांच मरीजों की मौत हो गई। इसपर उच्चतम न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लिया है। अदालत ने गुरुवार को गुजरात सरकार को फटकार लगाते हुए कहा, 'कोई भी तथ्यों को दबा नहीं सकता है, तथ्यों के सही तरीके से सामने आने की जरूरत है।'
शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को गुजरात के राजकोट में स्थित एक अस्पताल में आग लगने से पांच मरीजों की मौत पर संज्ञान लिया था। अदालत ने देशभर में कोरोना के हालात को लेकर नाराजगी जताई और सख्त शब्दों में कहा था कि जुलूस निकाले जा रहे हैं और 80 फीसदी लोगों ने मास्क नहीं पहने हैं।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया था कि केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला शनिवार को पूरे भारत के सरकारी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा उपायों को लेकर बैठक करेंगे और इससे संबंधित निर्देश जारी करेंगे।
वहीं केंद्रीय गृह सचिव ने सोमवार को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने कहा था, 'मैं हाल के दिनों में अस्पतालों/ नर्सिंग होम में आग की घटनाओं की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा। अधिकारियों द्वारा अग्नि सुरक्षा उपायों का पालन न करना चिंता का विषय है।'
गृह सचिव ने आगे कहा था, 'हाल ही में राजकोट के एक अस्पताल के आईसीयू वार्ड में आग लगने की घटना में कोविड-19 के छह मरीजों की जान चली गई। वहीं अहमदाबाद के एक अस्पताल में आठ लोगों की मौत हो गई। जब भारत कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है, तो हमें ऐसी घटनाओं से बचने के लिए अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।'