गुजरात के सूरत जिले में किम रेलवे स्टेशन पर सोमवार को लोगों में दहशत फैल गई, जब पता चला कि स्टेशन के पास रेल की पटरियों के कई महत्वपूर्ण हिस्से गायब हैं। इन पटरियों से दिल्ली-मुंबई राजधानी एक्सप्रेस भी उन्हीं पटरियों से गुजरने वाली थी। राहत की बात यह रही कि इससे पहले रेल की पटरियों पर की गई तोड़फोड़ का पता लगा लिया गया।
हाल ही में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी रेलवे की पटरियों पर डेटोनेटर और गैस सिलेंडर मिलने क बाद मामले में की जांच में एनआईए जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियां शामिल हो हुईं। हालांकि, तीन दिन बाद ही यह खुलासा हुआ कि जिस ट्रैकमैन ने इस तोड़फोड़ का पता लगाया था, उसी ने दो अन्य रेलवे के कर्मचारियो के साथ मिलकर इस खतरनाक साजिश को अंजाम दिया था। उनका मकसद सोशल मीडिया पर प्रसिद्धी पाना, पदोन्नति और इनाम हासिल करना था। इसके अलावा वे चाहते थे कि रात की ड्यूटी जारी रहे, क्योंकि इसके अघले दिन उन्हें छुट्टी मिल जाती थी।
ठीक उसी तरह, शनिवार सुबह 5:25 बजे ट्रैकमैन सुभाष पोदार ने रेलवे अधिकारियों को बताया कि किम और कोसांबा रेलवे स्टेशनों के बीच कई लॉक खोले गए हैं और दो फिशप्लेट्स (जो दो पटरियों को जोड़ती हैं) को हटा दिया गया है। पोदार ने दावा किया कि उसने पेट्रोलिंग के दौरान तीन लोगों को पटरियों के पास देखा, लेकिन उसके चिल्लाने पर वे भाग गए।
राजधानी एक्सप्रेस और दादर-जोधपुर एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें इन पटरियों पर पहले गुजर चुकी थीं। लेकिन अगली ट्रेन को रोक दिया गया, जिससे बड़ा हादसा टल गया। पोदार और उसके साथी मनीष कुमार सुरदेव मिस्री, ठेकेदार शुभम जायसवाल और अन्य कर्मचारियों ने ट्रैक की मरम्मत कर संचालन को फिर से शुरू किया।
पुलिस और एनआईए के अधिकारियों ने जांच शुरू की तो पोदार की कहानी में कई खामियां नजर आईं जो ट्रेनें कुछ मिनट पहले इन पटरियों से गुजरी थीं, उनके लोको पायलटों ने कोई असमान्यता की रिपोर्ट नहीं दी। जबकि इतनी बड़ी संख्या में बोल्ट निकालने और फिशप्लेट्स को हटाने में कम से कम दो घंटे का समय लगता है। इसके अलावा, पोदार ने कहा था कि उसने तीन लोगों को देखा था। लेकिन उस जगह पर किसी और के पैरों के निशान नहीं मिले।
अधिकारियों ने बताया कि पोदार, मिस्त्री और जायसवाल ने रात का फायदा उठाकर यह काम सुबह तीन बजे शुरू किया था। जब भी ट्रेन गुजरती, वे छिप जाते। 4:58 बजे राजधानी एक्सप्रेस के गुजरने के बाद उन्होंने 5:25 बजे तक फिशप्लेट्स को हटाया और फिर अधिकारियों को सूचित किया।
पोदार ने लॉक और फिशप्लेट्स की वीडियो बनाई थी। लेकिन जांच में पता चला कि उसने वीडियो डिलीट कर दी। जांच में पता चला कि पोदार के फोन में 4:57 बजे एक वीडियो डाउनलोड किया गया, जो यह साबित करता है कि उसने साजिश पहले ही कर ली थी। मिस्री के फोन में 2:57 बजे का समय दिखाने वाली तस्वीरें भी मिलीं, जो साबित करती हैं कि उन्होंने तब से ही तोड़फोड़ शुरू कर दी थी।
सारे सबूत सामने आने के बाद तीनों ने अपने अपराध को कबूल कर लिया है। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि उन्होंने यह साजिश इसलिए रची थी, क्योंकि वे पदोन्नति, इनाम और सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि पाना चाहते थे। इसके अलावा, वे चाहते थे कि रात की ड्यूटी जारी रहे, ताकि उन्हें अतिरिक्त छुट्टी मिल सके और वे अपने परिवार के साथ अधिक समय बिता सकें।