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Gujarat Poll: आखिरी चरण के चुनाव में तीन जिले तय करेंगे चुनावी दशा-दिशा, 40% से ज्यादा सीटें इन्हीं जिलों में

Sun, 04 Dec 2022 09:41 PM IST
आशीष तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद

सार

अहमदाबाद, वडोदरा और बनासकांठा जिले की 40 सीटें गुजरात में होने वाले विधानसभा के चुनावों की दशा और दिशा तय करने वाली हैं। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि गुजरात के 33 जिलों में 6 जिले ऐसे हैं जहां से 40 फीसदी विधानसभा सीटें इन्हीं जिलों से आती हैं।
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गुजरात चुनाव
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विस्तार
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गुजरात के दूसरे और अंतिम चरण में होने वाले चुनाव की 93 सीटों में 3 जिले अहम भूमिका निभाने वाले हैं। अंतिम चरण की 40 फ़ीसदी से ज्यादा सीटें इन्हीं तीन जिलों में आती हैं। संख्या के लिहाज से अहमदाबाद, वडोदरा और बनासकांठा में 40 विधानसभा क्षेत्र जुड़ते हैं। 2017 के विधानसभा चुनावों में इन्हीं 40 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने 65 फीसदी सीटें जीती थी। सोमवार को इन्हीं जिलों की सीटों पर चुनाव होना है। जानकारों का कहना है कि इस बार का चुनाव 2017 के चुनावों से अलग है।

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अहमदाबाद, वडोदरा और बनासकांठा जिले की 40 सीटें गुजरात में होने वाले विधानसभा के चुनावों की दशा और दिशा तय करने वाली हैं। राजनीतिक विश्लेषक अनिरुद्ध भाई शाह कहते हैं कि गुजरात के 33 जिलों में 6  जिले से हैं जहां से समूचे गुजरात की तकरीबन 40 फीसदी विधानसभा सीटें इन्हीं जिलों से आती हैं। इनमें से चार जिलों में सोमवार को मतदान होना है। अनिरुद्ध भाई कहते हैं कि दूसरे चरण के 14 जिलों में होने वाले 93 सीटों का चुनाव कांटे का माना जाता है। 

वे कहते हैं कि आंकड़ों की बात करें तो 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने अहमदाबाद, वडोदरा और बनासकांठा की 40 सीटों में 26 सीटों पर कब्जा किया था। पूरे गुजरात के अहमदाबाद जिले की सबसे ज्यादा 21 सीटों में 15 पर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी चुनाव जीते थे। 10 सीटों वाले वडोदरा जिले की 8 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों ने कब्जा जमाया था। अनिरुद्ध भाई कहते हैं कि 2017 में बनासकांठा में भारतीय जनता पार्टी को 9 में से 3 सीटें मिली थी यहां पर कांग्रेस ने कड़ी टक्कर दे कर भारतीय जनता पार्टी को पीछे कर दिया था। 
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गुजरात के सियासी जानकार कृष्णमुरारी दवे कहते हैं कि वैसे तो कहा यही जाता है कि गुजरात में सूरत और अहमदाबाद जिसने जीत लिया समझ लो उसने गुजरात में सरकार बना ली। दवे कहते हैं कि गुजरात के जिन 6 जिलों में 40 फीसदी से ज्यादा सीटें आती हैं उनमें सूरत की 16 सीटें हैं। और राजकोट की भी 8 सीटें हैं। इन दोनों जिलों की 24 सीटों पर मतदान पहले चरण में हो चुका है। लेकिन 2017 के आंकड़ों में पहले चरण में जब भारतीय जनता पार्टी सौराष्ट्र और कच्छ से पिछड़ने लगी तो सूरत की 16 में से 15 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने अपना परचम लहरा दिया था। जबकि राजकोट की 8 सीटों में से 6 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी को जीत मिली थी। 

कृष्ण मुरारी कहते हैं कि 2017 के जो चुनावी समीकरण थे वह गुजरात के राजनीतिक नजरिए से सत्ता पक्ष के लिए बहुत कठिन थे। यही वजह रही कि सौराष्ट्र कच्छ में भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस की तुलना में कम सीटें मिली थी। वो कहते हैं कि इस बार वोटिंग प्रतिशत कम होने से तरह-तरह के सियासी आकलन लगाए जा रहे हैं। हालांकि वो कहते हैं कि आम आदमी पार्टी के चुनावी मैदान में आने से पहले चरण में लड़ाई कई सीटों पर त्रिकोणत्माक हो गई है। 

गुजरात के सियासी जानकारों का कहना है कि सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद, बनासकांठा और राजकोट जिले की 64 सीटों में से 47 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने 2017 के चुनावों में जीत हासिल की थी। जबकि 16 सीटों पर कांग्रेस ने अपना परचम लहराया था। 

राजनीतिक विश्लेषण विट्ठल भाई कहते हैं कि सोमवार को होने वाले विधानसभा के चुनावों में असली लड़ाई उत्तर गुजरात की 32 विधानसभा सीटों पर भी रोचक होने वाली है। वह कहते हैं कि 2017 के विधानसभा चुनाव में उत्तर गुजरात की इन सीटों पर कांग्रेस को 18 और भारतीय जनता पार्टी को 14 सीटें मिली थी। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वाले इन इलाकों में कांग्रेस की पकड़ बेहतर रही है। यही वजह है कि 2017 के चुनावों में यहां पर जातिगत समीकरणों के आधार पर कांग्रेस को बढ़त मिल गई थी। 

विट्ठल भाई कहते हैं कि 2017 में पूरे गुजरात में चलने वाले पाटीदार आंदोलन का उत्तर गुजरात के जिलों पर बहुत प्रभाव तो नहीं था लेकिन जिस तरीके से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अपने मुद्दे थे। हालांकि उनका कहना है कि भारतीय जनता पार्टी ने इस बार चुनाव में अपनी रणनीति बदलते हुए इन इलाकों के प्रत्याशियों को भी बदला है। इसलिए यहां पर लड़ाई रोचक मानी जा रही है। वह कहते हैं कि उत्तर गुजरात इस लिहाज से भी बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात से ही आते हैं। इसके अलावा गृह मंत्री अमित शाह की लोकसभा क्षेत्र का एक बड़ा हिस्सा उत्तर गुजरात में आता है।

गुजरात में सोमवार को जिन 93 सीटों पर चुनाव होना है उसे भारतीय जनता पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनावों में 51 सीटें जीती थी। जबकि कांग्रेस ने 39 सीटों पर जीत दर्ज की थी। सियासी जानकारों का कहना है कि सोमवार को होने वाले चुनावों में उत्तर गुजरात का एक बड़ा हिस्सा राजस्थान से भी लगता हुआ है। कांग्रेस ने रणनीति बनाते हुए उत्तर गुजरात में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को बड़ी जिम्मेदारी दी थी। 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगले साल होने वाले राजस्थान के चुनावों में उत्तर गुजरात से लगते हुए राजस्थान के जिलों से कांग्रेस अपने माहौल में हवा बनाने की तैयारी भी कर रही है। राजनैतिक विश्लेषक विट्ठलभाई बताते हैं कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के इलाकों वाले उत्तर गुजरात की कई सीटें ऐसी हैं जो राजस्थान के विधानसभा क्षेत्रों को प्रभावित भी करती हैं। यही वजह है कि कांग्रेस ने रणनीतिक तौर पर उत्तर गुजरात में अपने राजस्थान के नेताओं को न सिर्फ चुनाव प्रचार के लिए लगाया है बल्कि राजस्थान के चुनावी नजरिए से भी उसको बहुत प्रभावी मानकर चल रहे हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी ने इस बार उत्तर गुजरात में अपनी रणनीति बदलते हुए चुनावी रण में बेहतरीन फील्डिंग सजाई है।

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