राज्य के परिवहन मंत्री ने कहा कि केरल सरकार विझिंजम पोर्ट पर केंद्रीय बलों की तैनाती के प्रयास नहीं कर रही है। यह काम राज्य सरकार को नहीं करना है, लेकिन राज्य सरकार को अदाणी समूह की इस मांग का विरोध भी नहीं करना चाहिए।
लेकर केरल सरकार और सत्तारूढ़ एलडीएफ और विपक्षी दलों के मतभेद आ गए। इस संबंध में केरल सरकार ने हाईकोर्ट में सहमति का हलफनामा दाखिल किया है। राज्य के परिवहन मंत्री एंटनी राजू का कहना है कि अदाणी समूह की इस मांग का विरोध नहीं करना चाहिए। वहीं सत्तारूढ़ एलडीएफ और विपक्षी कांग्रेस का मत है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए केंद्रीय बल तैनात करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
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राज्य सरकार के परिवहन मंत्री राजू ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, निर्माणाधीन साइट पर सुरक्षा मुहैया कराने के लिए अदाणी समूह ने हाईकोर्ट में केंद्रीय बलों की तैनाती की अपील की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विझिंजम पोर्ट पर केंद्रीय बलों की तैनाती के प्रयास नहीं कर रही है। यह काम राज्य सरकार को नहीं करना है, लेकिन राज्य सरकार को अदाणी समूह की इस मांग का विरोध भी नहीं करना चाहिए।
इसको लेकर उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधा और कहा कि वह इसको लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों का राजनीतिक लाभ लेना चाहते हैं। विपक्ष विरोध प्रदर्शनों को हाइजैक करना चाहता है। राजू ने यह भी कहा कि किसी भी मंत्री ने प्रदर्शनकारियों को आतंकी नहीं कहा है।
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उधर, सत्तारूढ़ एलडीएफ के नेता और केरल के बंदरगाह (पोर्ट) मंत्री अहामेद देवरकोविल ने कहा, पोर्ट का निर्माण करा रहे अदाणी समूह को साइट पर कानून-व्यवस्था बनान के लिए हमें केंद्रीय बलों की मदद की जरूरत नहीं है। केरल पुलिस ऐसा करने में सक्षम है। हम उन्हें सुरक्षा नहीं दे रहे हैं।
मंत्री ने कहा, इस मुद्दे पर प्रदर्शनकारियों से भी बातचीत चल रही है। पांच दिसंबर से विधानसभा संत्र शुरू हो रहा है। वहीं, कांग्रेस सांसद और केरल के पूर्व अध्यक्ष पीसीसी के. मुरलीधरन ने बी केंद्रीय बलों की तैनाती का विरोध किया है।