गुजरात के वडोदरा जिले के सावली में एक विशेष पॉक्सो अदालत ने मंगलवार को 2016 में बच्चे के साथ दुष्कर्म करने के बाद हत्या के मामले में सजा का एलान किया। विशेष न्यायाधीश जे ए ठक्कर ने इस मामले में सुनवाई के बाद 20 वर्षीय आरोपी धीरेंद्र सिंह ठाकोर को मौत की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने वडोदरा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से लड़के के माता-पिता को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की भी सिफारिश की है।
सजा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी का अपराध 'दुर्लभ से दुर्लभतम' की श्रेणी में आता है। अदालत ने कहा कि अपराध पूर्व नियोजित था, और किसी भी प्रकार की उत्तेजना के बिना किया गया था।
गौरतलब है कि धीरेंद्र सिंह ठाकोर ने अक्टूबर 2016 में फिरौती के लिए लड़के का अपहरण किया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, धीरेंद्र सिंह ठाकोर उस समय अपने नाना-नानी के साथ देसर गांव में रहता था। उसने 21 अक्टूबर, 2016 को लड़के का अपहरण कर लिया। आरोपी ने लड़के को अपने नाना-नानी के घर में एक कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद उसने लड़के के पिता को मैसेज कर बच्चे को छुड़ाने के लिए 10 लाख रुपये की मांग की।
रुपये ना मिलने पर उसने बच्चे के साथ दुष्कर्म कर लड़के की गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपी ठाकोर ने मृतक के शव को एक डिब्बे में भरकर उसी कमरे में छोड़ दिया और बच्चे को ढूढने वालों में शामिल हो गया। इसके बाद जब खोजबीन के बाद बच्चे का शव मिला तो उसे संदेह के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया।
मामले में जांच के बाद पॉक्सो अदालत ने आरोपी ठाकोर को भारतीय दंड संहिता की धारा 363 (अपहरण), 364 (ए) (फिरौती के लिए अपहरण), 302 (हत्या), 201 (सबूत गायब करना), 377 (अप्राकृतिक अपराध) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 के तहत दोषी ठहराया था।