कोविड-19 संक्रमण के बाद मल्टीपल ऑर्गन फैलियर से मरणासन्न पति के स्पर्म से एक महिला को मां बनने की अनुमति गुजरात हाईकोर्ट ने दे दी है। महिला ने खुद हाईकोर्ट से यह अनुमति देने की गुहार लगाई थी। उसकी याचिका को सुनकर हाईकोर्ट जज भी कुछ पल के लिए स्तब्ध रह गए। बाद में उन्होंने अस्पताल को महिला की इच्छा पूरी करने के निर्देश दिए।
इससे पहले वडोदरा के संबंधित अस्पताल ने महिला के पति के होशोहवास में न होने से उनके शुक्राणु लेकर आईवीएफ या एआरटी के जरिये महिला को गर्भवती करने की कानूनी अनुमति न होने की बात कही थी।
महिला ने हाईकोर्ट में बताया था कि उनकी शादी अक्टूबर 2020 में हुई, इसके बाद वे विदेश चले गए। दुर्भाग्य से अगले ही वर्ष फरवरी में उनके ससुर को हार्टअटैक हुआ, वे पति के साथ भारत लौटीं। इसी बीच पति को कोविड-19 हो गया। उन्हें 10 मई को वडोदरा के अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां वे वेंटिलेटर पर हैं। कई अंग काम करना बंद कर चुके हैं।
पूर्व अनुमति जरूरी
भारत में किसी व्यक्ति के शुक्राणु लेने के लिए उसकी पूर्व अनुमति अनिवार्य है। इसके लिए आईसीएमआर ने स्पर्म बैंक गाइडलाइन जारी की हैं। चिकित्सक अपनी मर्जी से यह कदम नहीं उठा सकते। लेकिन ब्रेन डेड या होश हवास खो बैठे व्यक्ति को लेकर नियम साफ नहीं हैं।
2018 में भी एक मामला सामने आया जहां अभिभावक सड़क हादसे में बुरी तरह घायल 22 साल के अविवाहित पुत्र के शुक्राणु संरक्षित रखना चाहते थे। पर नियम नहीं होने से ऐसा नहीं किया जा सका व बाद में युवक की मौत हो गई।