गुजरात के एक सरकारी अधिकारी ने दावा किया है कि वह भगवान विष्णु का दसवां अवतार कल्कि है। वह दुनिया को बदलने के लिए तपस्या कर रहा है, इसलिए ऑफिस नहीं आ सकता है। अधिकारी ने ये बात उस नोटिस के जवाब में कही है, जो उनके लगातार ऑफिस से गायब रहने पर जारी किया गया था। उम्र के 50वें दशक के अंतिम पड़ाव पर मौजूद रमेशचंद्र फेफर ने कहा है कि उसकी तपस्या से देश में पिछले 19 साल से अच्छी बारिश हो रही है। सरदार सरोवर पुनर्वास एजेंसी में सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर पद पर कार्यरत रमेश को नोटिस जारी किया गया था, क्योंकि वे कई दिनों से छुट्टी पर थे।
तीन दिन पहले इसके दो पेज लंबे जवाब में उन्होंने यह हास्यास्पद जवाब दिया है। उनका यह जवाब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। पिछले 8 महीने में अपने वड़ोदरा स्थित कार्यालय में मात्र 16 दिन काम करने वाले रमेश ने कहा है कि अगर लोगों को भरोसा नहीं हो रहा है कि वह
कल्कि है तो वह जल्द इसे साबित कर देंगे। राजकोट में अपने घर पर मीडिया से बात करते हुए रमेश ने शुक्रवार को कहा, मार्च, 2010 में एक दिन ऑफिस में काम करते हुए उसे एहसास हुआ कि वह भगवान का 10वां अवतार हैं और उनके पास दैवीय शक्तियां हैं।
याद आया यूपी के डीआईजी पांडा का मामला
गुजरात के इस मामले से एक बार फिर उत्तर प्रदेश का 13 साल पुराना मामला चर्चा में आ गया है, जब डीआईजी रैंक के एक पुलिस अधिकारी डीके पांडा ने खुद को भगवान कृष्ण की दूसरी राधा घोषित कर दिया था। 1971 बैच के आईपीएस अधिकारी डीके पांडा वर्ष 1991 से महिला वेश में सज-धज कर रहते थे और खुद को दूसरी राधा बताते थे।
महिलाओं की तरह मांग टीका और नाक में नथ पहनने वाले पांडा सिर में सिंदूर लगाकर मांग भी भरते थे। उन्होंने लखनऊ में अपने सरकारी आवास की नेम प्लेट पर भी अपने नाम के आगे दूसरी राधा लिखवा लिया था। उन्होंने भी अपने सामने भगवान
कृष्ण के प्रकट होने और उन्हें दूसरी राधा का दर्जा देने का दावा किया था। वर्ष 2005 में वे महिला वेश में ही अपने कार्यालय पहुंच गए थे। इसके चलते उन पर पुलिस ड्रेस कोड व सेवा नियमों को तोड़ने के आरोप में विभागीय कार्रवाई के चलते तय समय से दो साल पहले ही रिटायरमेंट लेना पड़ा था।