मुंबई-अहमदाबाद के बीच दौड़ने वाली बुलेट ट्रेन को लिए गुजरात सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर किसानों ने अपना एतराज जताया है। योजना से प्रभावित किसानों ने सोमवार को गुजरात हाईकोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार ने स्वयं भूमि अधिग्रहण करने के बजाय गुजरात सरकार को भूमि अधिग्रहण करने की शक्ति दे दी है जो कि असंवैधानिक है। वहीं इस मामले में रेल मंत्रालय ने 12 अक्तूबर को एक हलफनामा दाखिल किया था। जिसमें कोर्ट को बताया उसने आठ अक्तूबर को एक अधिसूचना जारी किया था जिसमें उसने राज्य सरकार को पूर्ववर्ती प्रभाव से भूमि अधिग्रहण करने की शक्ति प्रदान की थी।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह अधिसूचना अवैध एवं असंवैधानिक है क्योंकि इससे संबंधित मामलों की याचिका जून में ही दाखिल कर दी गई थी, जिन पर सुनवाई चल रही है। और केंद्र ने इसके बाद ही अधिसूचना जारी की है। इसके साथ ही अधिसूचना में केंद्र सरकार ने स्वीकारा था कि केंद्र सरकार की जमीन अधिग्रहण करने के लिए उचित है न कि गुजरात सरकार। इस प्रकार जमीन अधिग्रहण कानून 2013 के मुताबिक राज्य सरकार जमीन अधिग्रहण करने के लिए उचित नहीं है।
ऐसे में राज्य सरकार द्वारा जारी सभी अधिसूचना स्वत: ही रद्द हो जाती है। इसी के चलते जमीन का अधिग्रहण राज्य द्वारा संशोधित भूमि अधिग्रहण कानून 2016 के बजाय साल 2013 के असंशोधित केंद्रीय विधेयक के तहत होनी चाहिए। इसके साथ ही इस परियोजना में कई राज्य जुड़े हुए हैं अत: जमीन का अधिग्रहण 2013 के केंद्रीय कानून के तहत होना चाहिए। किसानों के मुताबिक गुजरात के भूमि अधिग्रहण में भूमि मालिकों को दिए गए कई संरक्षण कमजोर किए गए हैं।